नई दिल्ली। मौजूदा समय में लोकपाल बिल को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि ये ज्यूडिशरी से ऊपर होगा, लेकिन ये गलत है। लोकपाल के पास किसी को सजा देने का अधिकार नहीं होगा। वो केवल आरोपों का जांच कर अदालत के समक्ष अपनी बात को रखेगा। ये कहना लोकपाल कमेटी में सिविल सोसायटी के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल है। आईबीएन7 के खास कार्यक्रम हॉट सीट में मैनेजिंग एडिटर आशुतोष से बातचीत में केजरीवाल ने लोकपाल बिल की कई अहम जानकारियां दी।
केजरीवाल ने कहा कि शुरुआती दिनों में तो सरकार लोकपाल बिल को लेकर छोटे-छोटे मुद्दों पर चर्चा करती रही, लेकिन जब 30 मई को सिविल सोसायटी के सदस्यों ने 6-7 क्रिटिकल मुद्दे उठाए तो सरकार एक-एक कई मुद्दों पर असहमति जताने लगी। सरकार की ओर से कहा कि इस दायरे में प्रधानमंत्री, न्यायाधीश, सांसद और ब्यूरोक्रेट्स नहीं आ सकते। यानि भ्रष्टाचार को लेकर सरकार की मशां साफ हो गई। फिर हमने कहा कि अब इसमें बचा ही क्या?

सरकार की ओर से कहा जा है कि हम 30 जून तक बिल तैयार कर लेंगे, लेकिन ये कौन सा बिल तैयार होगा जिसके दायरे से प्रधानमंत्री, न्यायाधीश, सांसद और ब्यूरोक्रेट्स बाहर होंगे। हम ऐसे बिल को लेकर कतई सहमत नहीं हो सकते। सरकार के तरफ से सवाल उठाए जा रहे हैं कि अगर पीएम इसके दायरे में आ जाएंगे तो वो डिशफनशनल हो जाएंगे। केजरीवाल ने बताया कि बोफोर्स मामले में राजीव गांधी के खिलाफ जांच हुई और वो अपने पद पर बने रहे। ये कहना गलत होगा कि प्रधानमंत्री इसके दायरे में आने से डिशफनशनल हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पीएम को लोकपाल के दायरे में आना बेहद जरूरी है, क्योंकि उनके पास तमाम मंत्रालय होते हैं। पीएम के पास सिक्युरिटी संबंधी पूरी जानकारी होती है। ऐसे में अगर प्रधानमंत्री गलत या भ्रष्ट निकले तो देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा होगा। उन्होंने कहा कि अगर मधु कोड़ा जैसे भ्रष्ट व्यक्ति पीएम बन जाएं और फिर उन्हें लोकपाल से बाहर रखा दिया जाए तो तमाम सांसद तो यही कहेंगे कि पीएम को घूस पहुंचा दो क्योंकि वो इस दायरे में नहीं हैं।
केजरीवाल ने आईबीएन7 के माध्यम से प्रधानमंत्री से अपील की कि वो खुद इस बिल के दायर में आने की पेशकश करें। उनकी छवि-सुथरी है जिसे लोग सम्मान करते हैं। साथ ही उन्होंने सोनिया ने अपील की कि वो ऐलान करें कि उनका प्रधामंत्री लोकपाल के दायरे में आएंगे। केजरीवाल ने सवाल उठाया कि संसद में जुलाई 2008 को यूपीए सरकार के बहुमत साबित करने के दौरान जो नोटों के बंडल उछाले गए, उससे लोकतंत्र पूरी तरह से शर्मशार हो गया। लेकिन किसी के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए एमपी को इस दायरे में लाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि अगर प्रधानमंत्री और ज्यूडिशरी के खिलाफ फर्जी शिकायत आएंगे तो इसके लिए भी कार्रवाई के प्रावधान इस बिल में होंगे।
केजरीवाल ने बताया कि लोकपाल ज्यूडिशरी से आगे नहीं होगा, अगर किसी न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत होगी तो ये कमेटी केवल जांच करेगी और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी बात को रखेगी। लोकपाल अपना फैसला नहीं दे सकता। लोकपाल भष्मासुर साबित नहीं होगा। इसके अंदर पूरी पारदर्शिता होगी। लोकपाल भ्रष्ट न हो इसके लिए कुछ प्रावधान होंगे। जांच पूरी होने पर पूरी डिटेल को वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। सभी राज्यों में एक स्वंतत्र संस्था बनेगी। अगर लोकपाल मेंमर भ्रष्ट पाए जाएंगे तो उन पर 3 महीने के अंदर सुप्रीम कोर्ट द्वारा उचित कार्रवाई की जाएगी।
पूरी बातचीत वीडियो में देखें।
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