नई दिल्ली। मालेगांव धमाके के आरोपी कर्नल पी एस पुरोहित को आज नासिक कोर्ट में पेश किया गया। जहां कोर्ट ने पुरोहित की एटीएस रिमांड को 18 नवंबर तक बढ़ा दी।
नासिक कोर्ट में एटीएस ने कहा कि पुरोहित ने कबूल किया है कि समझौता एक्सप्रेस में धमाकों के लिए 60 किलो RDX उसने भगवान दास नाम के शख्स को दिया था। एटीएस ने कोर्ट के समक्ष कहा कि अभी इस मामले में पुरोहित से पूछताछ पूरी नहीं हो पाई है। इसलिए पुरोहित की एटीएस रिमांड को बढ़ाई जाए। कोर्ट ने एटीएस की अर्जी पर गौर करते हुए पुरोहित की रिमांड 18 नवंबर तक बढ़ा दी।
मालूम हो कि मालेगांव धमाके के सिलसिले में एटीएस ने पुरोहित का नार्को टेस्ट कराया गया। जिसमें पुरोहित ने कई सनसनीखेज खुलासे किए। पुरोहित ने कबूला कि उसने साध्वी प्रज्ञा और फर्जी शंकराचार्य दयानंद के साथ मिलकर करीब 800 लोगों को आतंकवादी बनने की ट्रेनिंग दी।
नार्को टेस्ट में पुरोहित से कुछ इस तरह पूछताछ हुई।
-क्या तुम प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जानते हो?
पुरोहित- हां।
-प्रज्ञा से तुम कैसे मिले, कहां मिले थे?
पुरोहित- जम्मू में शारदा सर्वज्ञ पीठ के महंत स्वामी दयानंद ने मुझे साध्वी प्रज्ञा सिंह से मिलवाया था। स्वामी दयानंद ने कहा था कि प्रज्ञा सिंह को आतंकवादी हमलों के लिए पूरी मदद दिलवाओ।
-क्या तुमने लोगों को बम बनाने की ट्रेनिंग दी?
पुरोहित- स्वामी दयानंद ने ही मुझे 800 लोगों को ट्रेनिंग में मदद करने को कहा था। इन 800 लोगों को देश के अलग- अलग हिस्सों में धमाके करने की जिम्मेदारी दी जानी थी।
-तुम्हारे संगठन का मकसद क्या है ?
पुरोहित - हम लोग सिमी के मुकाबले एक ताकतवर संगठन बनाना चाहते थे। उन्हें मुंहतोड़ जवाब देना चाहते थे ताकि धमाकों में लोगों को मारने से पहले वो बार-बार सोचें।
-तुम्हारे संगठन का मुखिया कौन था। तुम किसके इशारे पर काम कर रहे थे ?
जवाब- स्वामी दयानंद और मैंने मिलकर अपना आतंकवादी संगठन खड़ा किया था। स्वामी दयानंद ने ही नांदेड़ धमाके की साजिश रची थी। अजमेर धमाके का प्लान भी उसी ने बनाया।
नार्को टेस्ट के दौरान खड़े मुंबई एटीएस के अधिकारी इस जवाब के बाद सन्नाटे में आ गए क्योंकि अजमेर धमाके के पीछे पहली बार इस हिंदूवादी संगठन का नाम सामने आ रहा था।
नार्को टेस्ट के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने ये भी खुलासा किया है कि स्वामी दयानंद पांडे का अहमदाबाद में भी एक आश्रम है। इस आश्रम का इस्तेमाल संगठन से जुड़े लोगों को ठहराने के लिए किया जाता था ताकि धमाकों में उनकी मदद ली जा सके।
लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने उन लोगों के नाम का भी खुलासा कर दिया है जो उसके संगठन के अहम पदों पर काम कर रहे थे। उसने ये भी बताया है कि धमाके के लिए विस्फोटक कहां से आया और किस रास्ते मालेगांव तक पहुंचा।
दरअसल मुंबई एटीएस को पंचमढ़ी में पुरोहित के घर से ट्रेनिंग का एक वीडियो मिला था। इस वीडियो में पुरोहित के अलावा साध्वी प्रज्ञा सिंह और यूपी का एक धर्मगुरु भी दिखाई दिए थे। ट्रेनिंग महाराष्ट्र के तटीय इलाके सिंधुदुर्ग में दी गई। ये ट्रेनिंग कब हुई और इसमें कुल कितने लोग मौजूद थे अभी ये पता नहीं चल सका है। साल 2000 में पुणे के सिंहगढ़ में 115 लोगों को ट्रेनिंग दी गई। इनमें से 17 लोगों को फौजी पुरोहित ने खुद चुना और बम धमाके के लिए खास तौर पर तैयार किया। साल 2003 में फिर सिंहगढ़ में ट्रेनिंग कैंप लगा। इसमें दिल्ली, यूपी, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और गुजरात के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। उन्हें तीन तरह के बम बनाना सिखाया गया। 2006 में नांदेड़ में बम बनाते वक्त मारे गये हिमांशु को भी 2003 में ही ट्रेनिंग दी गई।
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