लखनऊ। भगवा आतंक को लेकर अब हायतौबा मची है, लेकिन असल में उसकी शुरुआत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से बहुत पहले ही हो चुकी थी। भगवा आतंक का पहला वार झेला टोपरी मस्जिद के इमाम शमीम ने। 4 जून 2002 को वो मस्जिद में नमाज पढ़ाने जा रहे थे।
तभी बाइक पर आए दो लड़कों ने उन्हें गोली मार दी। बाइक सवार जाते-जाते एक पर्चा फेंक गए थे। इस पर्चे पर लिखा था आर्य सेना का पैगाम। आर्य सेना के पर्चे पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर उगला गया था। साथ ही ये ऐलान भी था कि अब आतंक का मुकाबला आतंक से होगा। यूपी पुलिस ने जांच शुरू की तो एक के बाद एक पांच घटनाएं जुड़ती चली गईं।
टोपरी मस्जिद के इमाम पर हमले के अलावा मंगलू वाली मस्जिद और एक मदरसे के बाहर भी धमाका किया गया था। साथ ही एक खास मस्जिद के बाहर तीन बार आईईडी लगाने की कोशिश की गई थी। इन धमाकों के पीछे एक ही नाम था- आर्य सेना। देखते ही देखते पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक समुदाय में आर्य सेना का खौफ बढ़ता चला गया।
पुलिस के सामने चुनौती भरा सवाल था-आतंक का मुकाबला आतंक से करने वाली आखिर किसकी है ये आर्यसेना। सात साल पहले यूपी में बनाई गई आर्यसेना लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। वजह पिछले सात साल से यूपी सरकार अपनी एक खुफिया रिपोर्ट को दबाकर बैठी रही। आर्यसेना का खौफ बढ़ता ही जा रहा था लेकिन जब भी पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई की कोशिश की आर्यसेना को उसकी भनक लग जाती।
जब अपने ही बीच बैठे खबरियों को तलाशने की कोशिश की गई तो सामने आया कांस्टेबल सत्येंद्र मलिक। जब सख्ती हुई तो पुलिस के सामने उसने सारा सच उगल दिया। मलिक ही था आर्य सेना का मास्टरमाइंड। उसी ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ लोगों को भड़काकर अपनी सेना बना ली थी। आईबीएन 7 के पास पुलिस की वो खुफिया रिपोर्ट है जिससे साबित होता है कि आर्य सेना ने किस तरह अल्पसंख्यकों के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी थी।
आर्य सेना में उत्तराखंड, कोलकाता और हरियाणा तक के लोग शामिल थे।
इस रिपोर्ट में ये भी खुलासा किया गया है कि आर्य सेना एक बड़ा हमला करने की तैयारी में थी और उसका सिद्धांत एक ही था आतंक के बदले आतंक। जिस वक्त ये रिपोर्ट आई उस दौरान यूपी में बीजेपी-बीएसपी की साझा सरकार थी। बीजेपी को पुलिस का ये खुलासा रास नहीं आया। लिहाजा भगवा आतंक की ये पहली घटना पुलिस रिकॉर्ड में दबा दी गई।
हालत ये थी कि यूपी पुलिस पहले ये मानने को ही तैयार नहीं थी कि राज्य का भगवा आतंक से कोई रिश्ता रहा है। लेकिन जैसे आईबीएन 7 ने अधिकारियों को रिपोर्ट दिखाई उनके सुर बदल गए। बृजलाल, लॉ एंड ऑर्डर के एडीजी का कहना है कि ये संगठन रहा है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। पुलिस की मानें तो उस वक्त सत्ता से जुड़े लोग आर्य सेना की काफी मदद करते थे। यूपी पुलिस ने जब आर्य सेना के 6 लोगों को पकड़ा तो उन पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
तब की बीजेपी-बीएसपी सरकार इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना चाहती थी। नतीजा ये हुआ कि आर्य सेना का मास्टरमाइंड मलिक अब जमानत पर बाहर है। वो कहां है इसकी पक्की खबर किसी को नहीं। ऐसे में अगर उस वक्त की आर्य सेना ने आज के अभिनव भारत की शक्ल ले ली हो तो जवाब यूपी सरकार को ही देना होगा।
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