नई दिल्ली। फिल्म मर्डर-2 की ओपनिंग से निर्देशक महेश भट्ट बेहद खुश हैं, लेकिन इस खुशी को वो जिंदगी से जोड़कर नहीं देखते। वो फिल्म की सफलता और असफलता को बाजार से जोड़कर देखते हैं। आईबीएन7 के खास कार्यक्रम हॉट सीट पर मैनेजिंग एडिटर आशुतोष के सामने महेश भट्ट ने जिंदगी से जुड़ी कई पहलुओं पर चर्चा की।
महेश भट्ट का कहना है कि वो इस दुनिया की भीड़ से अलग हैं, चाहे वो फिल्मी सफर हो या निजी जिंदगी। उन्हें हमेशा तन्हा रहना ही अच्छा लगा है। वो कहते हैं कि इस तन्हाई की वजह को वो आज तक नहीं समझ पाए हैं। वो परिवार में भी सबसे अलग हैं, घर में सब लोग जब भी खुशी का जश्न मनाते हैं तो वो उन लोगों के बीच उस समय अपने आप को अहसहज महसूस करते हैं।

भट्ट कहते हैं कि बचपन में उन्होंने घर में कुछ ऐसा माहौल देखा, जिससे वो अपने आप को लेकर हमेशा पशोपेश में रहते थे, क्योंकि मां शिया मुसलमान परिवार से थी और पिता जी ब्राह्मण। जिसके बीच उन्हें खुद की पहचान को लेकर हमेशा मन सवाल उठते रहते थे। तभी उन्होंने फैसला किया कि वो इस भीड़ से अलग हैं और उन्हें अपनी पहचान खुद बनानी होगी। जिसके बाद उन्होंने खुद को फिर से इस समाज के बीच जन्म देने की कोशिश की। उन्हें इस समाज की कोई शिकायत नहीं है। लेकिन वो कहते हैं कि कुछ यादें उनके साथ ऐसी जुड़ी हैं जो आज भी उन्हें झकझोर देती है। भट्ट की मानें तो परिवार के लोग भी आज तक उन्हें नहीं समझ पाए हैं कि आखिर इस शख्स की पहचान क्या है।
अपनी फिल्मी सफर के बारे में वो कहते हैं कि बॉक्स ऑफिस एक दुकान की तरह है। और वो भी एक दुकान चलाते हैं, जैसी मांग होती है उस तरह की चीजें वो दिखाते हैं। फिल्म सारांश की असफलता के बारे में भट्ट कहते हैं कि लोग इस तरह की फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं लेकिन जब बनती है तो देखने नहीं जाते। भट्ट की मानें तो इस भागदौड़ भरी जिंदगी में बने रहने के लिए समय के मुताबिक फिल्में बनाने में ही समझदारी है।
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