मुंबई। गुरुवार को प्रेस से रूबरू मुंबई एटीएस की हालत सांप छछूंदर वाली थी। एटीएस के मुखिया हेमंत करकरे समझौता एक्सप्रेस धमाके पर नासिक कोर्ट में दी गई अपनी ही दलील से मुकरते नजर आए।
दरअसल 15 नवंबर को मालेगाव धमाकों के आरोपियों की रिमांड मांगते सरकारी वकील ने अदालत में कहा कि लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित 2006 में देवलाली बेस कैंप में तैनात थे। उस समय उन्होंने 60 किलो RDX की हेरा-फेरी की थी।
इस RDX का एक बड़ा हिस्सा जम्मू-कश्मीर की झेलम नदी में फेंका गया था और एक हिस्सा पुरोहित ने भगवान नाम के किसी शख्स को समझौता एक्सप्रेस धमाके के लिए दिया होगा। एटीएस को इस सच्चाई का पता लगाना है।
यानी एटीएस ये बताने की कोशिश कर रही थी समझौता धमाकों में पुरोहित का भी हाथ था और इसी की वो तहकीकात करना चाहती थी।
लेकिन आईबीएन 7 की तहकीकात ने एटीएस के झूठ का पर्दाफाश कर दिया। यहां तक कि एटीएस समझौता एक्सप्रेस की जांच से ही पीछे हट गई।
ATS यूं ही नहीं पलटी दरअसल IBN7 के खुलासे ने उसे पीछे हटने को मजबूर कर दिया। गौरतलब है कि समझौता एक्सप्रेस की फोरेंसिक रिपोर्ट में कहीं भी आरडीएक्स का जिक्र नहीं है।
इन बमों में अमोनियम नाइट्रेट और सल्फ्यूरिक एसिड के साथ केरोसिन ऑयल का इस्तेमाल किया गया था।
IBN7 ने सवाल किया कि अचानक ATS ने समझौता एक्सप्रेस से RDX को कैसे जोड़ लिया?
तत्कालीन विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने धमाके के पीछे पाकिस्तान में बैठे रसूल पार्थी का नाम लिया था। ये खुलासा उन्होंने भारत पाकिस्तान के बीच हुई सचिव स्तर की बातचीत में किया था।
IBN7 ने सवाल किया कि क्या मुंबई एटीएस केंद्रीय एजेंसियों को भी झूठा ठहराना चाहती है?
गौरतलब है कि फरवरी 2007 में दिल्ली से करीब 90 किलोमीटर दूर समझौता एक्सप्रेस में हुए धमाके में मारे गए 68 लोगों में पाकिस्तानी, भारतीय और फौजी थे। अब ATS का कहना है कि अदालत में सरकारी वकील ने जो बोला वो एक गवाह के बयान के आधार पर बोला था।
लेकिन सवाल अब भी कई हैं जिनका जवाब देना ATS के लिए मुश्किल हो सकता है।
जो बात IBN7 को पता थी उस बात को ATS ने खुद पता करने की कोशिश क्यों नही की।
समझौता एक्सप्रेस धमाके में RDX के इस्तेमाल की जांच की बात कहां से आई।
और अब अचानक समझौता एक्सप्रेस की जांच उसके दायरे के बाहर कैसे हो गई।
इसके साथ ही एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे ने गुरुवार को ये भी बताया कि मामले जांच प्रगति पर है और जल्द ही पूरी होगी। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इस मामले में एटीएस किसी राजनीतिक दबाव में जांच कर रही है।मकोका के अंतर्गत एटीएस आरोपियों के खिलाफ छह महीनों में आरोप पत्र दाखिल करेगी।
एटीएस ने कहा कि एक वीडियो उसके हाथ लगी है जिसमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, दयानंद पांडे और कट्टरपंथी संगठन 'अभिनव भारत' केनेता समीर कुलकर्णी एक मंच पर साथ दिख रहे हैं। यह वीडियो 12 अप्रैल, 2008 का है जिसे भोपाल में कुलकर्णी द्वारा आयोजित एक समारोह में शूट किया गया था।
गौरतलब है कि 29 सितंबर को हुए मालेगांव विस्फोट में छह लोग मारे गए थे।
(IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!)
More on: ATS, Backfoot, Mumbai, Bhagwa Atankwad








कमेंट्स
3