मुंबई। साध्वी प्रज्ञा सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित और स्वामी दयानंद पांडे। तीनों के ही पास मुंबई एटीएस को लैपटॉप मिला। मालेगांव धमाके की साजिश के लिए तानाबाना तीनों ने ही लैपटॉप पर बुना। लेकिन अब इन्हीं तीनों के लैपटॉप अभिनव भारत संगठन के सारे राज खोल रहे हैं।
आईबीएन 7 को मिली जानकारी के मुताबिक अभिनव भारत से जुड़े लोगों के काम करने का तरीका बिल्कुल वैसा ही था जैसा हाइटेक आतंकवादियों का होता है। इन्हें पता था कि ईमेल भेजने पर उसे ट्रैक किया जा सकता है इसलिए उन्होंने उस तरीके का इस्तेमाल किया जिससे ईमेल भी न भेजा जाए और दूसरों तक मैसेज भी पहुंच जाए। हाल के दिनों में पकड़े गए आतंकवादियों ने बताया है कि वो पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं तक इसी तरीके से संदेश भेजते थे।
पुरोहित और उसके साथी एक खास ईमेल एड्रेस का इस्तेमाल कर पहले पूरा मेल लिखा करते थे लेकिन उसे साथियों के ईमेल आईडी पर भेजने के बजाय सेव कर दिया जाता था। ये ईमेल ड्राफ्ट बॉक्स में सुरक्षित पड़ा रहता था।
इसके बाद किया जाता था मोबाइल से एक मैसेज-jai mata di, bharat mata ki jai, send this message to 5 person, definatly you will get success. जैसे ही अभिनव भारत से जुड़े लोगों को ये मैसेज मिलता था वो अपने अपने शहरों में उस एक खास ईमेल एड्रेस को खोल लिया करते थे। यानि सभी के पास उस मेल एड्रेस का पासवर्ड भी था। ड्राफ्ट बॉक्स में जाकर वो ईमेल पढ़ा करते थे और अगर कुछ जवाब देना होता था तो दोबारा नया मेल लिखकर उसे ड्राफ्ट बॉक्स में सेव कर दिया जाता था। अब मुंबई एटीएस अभिनव भारत के उस सामूहिक ईमेल एड्रेस की जांच कर रही है।
अभिनव भारत के पांच अहम लोगों को ईमेल एड्रेस का पासवर्ड पता था। इनके नाम हैं-दयानंद पांडे, लेफ्टिनेंट कर्नल पी एस पुरोहित, समीर कुलकर्णी, रमेश उपाध्याय और अजय रहिरकर। ईमेल आईडी के अलावा मुंबई एटीएस को एक और सनसनीखेज जानकारी हाथ लगी है।
लेफ्टिनेंट कर्नल पी एस पुरोहित और दयानंद पांडे ने एक वीएचपी नेता से 19 बार बात की थी। ये वीएचपी नेता कौन है और 19 बार क्यों उससे बात की गई इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। गिरफ्तार आरोपियों का मकसद सिर्फ देश के भीतर धमाके कराना ही नहीं था। बल्कि इनके निशाने पर सरहद पर बैठे कुछ लोग भी थे जिन्हें देश का दुश्मन नंबर एक माना जाता है। इस काम को पूरा करने के लिए कुछ खास लोगों को ट्रेनिंग तक मुहैया कराई गई थी।
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