बैंगलोर। मालेगांव धमाके के आरोपी स्वयंभू शंकराचार्य दयानंद ने अपने नार्को में कई सनसनीखेज खुलासे किए। किसी को नहीं मालूम कि साध्वी प्रज्ञा सिंह और कत्ल कर दिए गए सुनील जोशी के बीच महज दोस्ती थी या फिर कुछ और रिश्ता था।
लेकिन दयानंद ने नार्को में जो जवाब दिए हैं, उससे तो यही लगता है कि सुनील के मारे जाने के बाद प्रज्ञा बदले के जुनून से भर उठी थी। मालेगांव धमाका उसी बदले की आग का नतीजा था।
इसी सिलसिले में आरोपियों की मकोका कोर्ट में पेशी हुई। आरोपियों को 3 दिसंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत में प्रज्ञा ने आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) पर अश्लील सीडी सुनने के लिए बाध्य करने का आरोप लगाया। इस गहमागहमी के बीच अदालत की कार्यवाही कुछ देर के लिए रुक गई।
मालेगांव विस्फोट मामले के 10 में सात आरोपियों को सोमवार को मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून) अदालत में पेश किया गया। एटीएस ने रिमांड मांगा लेकिन विशेष न्यायाधीश ने सभी को 3 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
अदालत में सोमवार को जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई प्रज्ञा ठाकुर ने आरोप लगाया कि एटीएस अधिकारियों ने जांच में सहयोग नहीं करने पर उसे अश्लील सीडी सुनने के लिए बाध्य किया। इसके साथ ही उसने शारीरिक और मानसिक याताना देने का आरोप भी लगाया।
इसके साथ ही प्रसाद पुरोहित ने भी एटीएस पर उनकी पत्नी को धमकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन पर आरोप साबित करने के लिए एटीएस ने ही आरडीएक्स उनके घर पर रखवाया। उनके परिवार की महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी की।
सेवानिवृत्त मेजर रमेश उपाध्याय ने भी एटीएस पर शारीरिक और मानसिक यंत्रणा देने का आरोप लगाया।
इनके अलावा अजय रहरिकर, गोपाल सिंह कालसंगरा, श्याम साहू, और समीर कुलकर्णी को भी अदालत में पेश किया गया।
एटीएस ने इन आरोपियों पर पिछले सप्ताह मकोका के कठोर कानून लगाए थे। मकोका लगाने के बाद इन आरोपियों को केस दर्ज होने की तारीख यानी 29 सितंबर के बाद से 180 दिन तक एटीएस को यह छूट मिल गई कि इन्हें कभी भी रिमांड पर ले सकती है।
साध्वी ने पिछले सप्ताह नासिक की अदालत में हलफनामा दाखिल कर एटीएस पर यंत्रणा देने के आरोप लगाए थे। इसके बाद इस मामले में राजनीति गरमा गई थी।
इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी भारतीय जनता पार्टी नेता लाल कृष्ण आडवाणी से फोन पर बातचीत की थी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम. के. नारायणन ने आडवाणी को साध्वी के आरोपों की जांच का आश्वासन दिया था।
इससे पहले बैंगलोर में रविवार को हुए नार्को टेस्ट के दौरान दयानंद ने साध्वी प्रज्ञा सिंह और कत्ल कर दिए गए सुनील जोशी के बीच रिश्तों के बारे में कई राज उगले। दयानंद ने टेस्ट में कहा कि सुनील जोशी के मारे जाने के बाद प्रज्ञा बदले के जुनून से भर उठी थी। मालेगांव धमाका उसी बदले की आग का नतीजा था।
दरअसल दयानंद पांडे का 21 नवंबर 2008 को बैंगलोर में नार्को टेस्ट कराया गया। सूत्रों के मुताबिक अब मालेगांव धमाके की एक-एक साजिश का पर्दाफाश हो जाएगा। आईबीएन7 को दयानंद से पूछे गए कुछ सवालों और उनके जवाबों की फेहरिस्त हाथ लगे हैं। ये जवाब मालेगांव धमाके की हर कड़ी खोल कर रख देते हैं।
नार्को टेस्ट के दौरान दयानंद पांडे से पूछे गए कुछ सवाल इस प्रकार हैं
सवाल--किसने कराया मालेगांव धमाका, कौन धमाके का मास्टरमाइंड है?
दयानंद--मालेगांव धमाका साध्वी प्रज्ञा सिंह ने करवाए। प्रज्ञा ही धमाके की मास्टरमाइंड है। वही बदला लेना चाहती थी। उसी के कहने पर मालेगांव धमाके को अंजाम दिया गया।
सवाल--आखिर प्रज्ञा किससे बदला लेना चाहती थी? क्यों बदला लेना चाहती थी?
दयानंद--साध्वी प्रज्ञा सिंह अपने करीबी दोस्त सुनील की मौत से बेहद दुखी थी। प्रज्ञा के मुताबिक उसके दोस्त सुनील जोशी की मौत के पीछे सिमी के कुछ लोग थे। उन लोगों ने सुनील की हत्या कर दी थी। प्रज्ञा इस बात से सुलग रही थी। वो सिमी के लोगों से बदला लेना चाहती थी। वो उनको सबक सिखाना चाह रही थी। सुनील की मौत से वो बौखला गई थी।
सवाल--दयानंद आप क्यों जुड़े धमाके से?
दयानंद--प्रज्ञा को लोग साध्वी पूर्णचेतनागिरी के नाम से भी जानते थे। एक दिन वो मेरे पास आई। वो बेचैन थी। उसने मुझसे मदद मांगी। उसने कहा कि मेरे गहरे दोस्त सुनील जोशी की हत्या देवास में सिमी के लोगों ने कर दी है। मैं सिमी को खत्म करना चाहती हूं। सिमी के लोगों की हत्या करना चाहती हूं। आप इस काम में मेरी सहायता करिए।
सवाल--लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित कैसे जुड़ा धमाकों की साजिश से?
दयानंद--मैंने ही लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को प्रज्ञा से मिलवाया था। लेफ्टिनेंट ने प्रज्ञा की बहुत मदद की।
वहीं दूसरी ओर साध्वी प्रज्ञा ने अदालत में दाखिल किए गए अपने हलफनामा कहा था कि मालेगांव धमाके में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल वो सुनील जोशी को पहले ही बेच चुकी थी। लेकिन सुनील जोशी के घरवाले इस बात से बेहद खफा हैं। घरवालों ने आरोप लगाया है कि खुद बचने के लिए साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सरासर झूठ बोल रही है। प्रज्ञा के हलफनामे में लिखा है कि मैंने अपनी LML फ्रीडम मोटरसाइकिल मध्यप्रदेश के सुनील जोशी को अक्टूबर 2004 में बेच दी थी। जोशी ने 24,000 रुपए में ये मोटरसाइकिल खरीदी। RTO में जोशी के नाम गाड़ी ट्रांसफर करने के लिए जरूरी दस्तावेज पर दस्तखत भी कर दिए थे।
साध्वी प्रज्ञा ने जिस सुनील जोशी की हत्या का बदला लेने के लिए मालेगांव में धमाका किया वो कभी आरएसएस का प्रचारक था। कुछ साल पहले हत्या के एक आरोप में घिरने के बाद वो फरार हो गया था और देवास में बदली पहचान के साथ रह रहा था। करीब साल भर पहले देवास में सुनील की हत्या हो गई थी। तब संघ परिवार ने जोशी की हत्या के लिए सिमी को जिम्मेदार ठहराया था।
दरअसल मालेगांव बम धमाके का सुराग तलाशती पुलिस जिस बाइक तक पहुंची, उसी बाइक ने एटीएस को साध्वी प्रज्ञा सिंह तक पहुंचा दिया। गिरफ्त में आने के बाद से साध्वी प्रज्ञा सिंह लगातार कहती रही है कि उसने बहुत पहले ही अपनी बाइक सुनील जोशी नाम ते शख्स को बेच दी थी।
मालेगांव ब्लास्ट से ठीक 10 महीने पहले यानी 29 दिसंबर 2007 को सुनील जोशी की हत्या कर दी गई थी। उस समय सुनील जोशी देवास के पास बदली पहचान के साथ एक आश्रम बनाकर रह रहा था। जोशी को तब कई लोग गुरूजी कहकर बुलाते थे।
आखिर क्यों जोशी को अपनी पहचान छुपानी पड़ी? इसकी भी एक कहानी है। साल 2003 में सुनील जोशी आरएसएस के प्रचारक था औहर महू में रहता था। महू में कांग्रेस के एक स्थानीय नेता प्यारे सिंह निनामा से उसकी तकरार चलती थी।
कहा जाता है कि निनामा ने एक बार सरेआम जोशी की चुटिया काट डाली थी। इसी के बाद दोनों के बीच तनातनी बढ़ गई। इसी तनातनी के दौर में एक दिन अचानक निनामा और उसके बेटे की हत्या हो गई और इसका इलजाम लगा सुनील जोशी पर।
निनामा हत्याकांड में नाम आने के बाद से सुनील जोशी फरार हो गया । फरारी के दिनों में देवास आश्रम में जोशी से मिलनेवालों में इक्के-दुक्के ही लोग थे। ऐसा कहा जाता है कि कभी-कभार साध्वी प्रज्ञा उससे मिलने जाती थी। उसके साथ चार और लोग रहते थे।
बीते साल 29 दिसंबर को कार और बाइक से आश्रम पहुंचे हत्यारों ने जोशी को गोलियों से भून डाला। इसके बाद आश्रम में रहने वाले उसके सहयोगी भी गायब हो गए। हत्या के बाद ही खुलासा हुआ कि देवास आश्रम का गुरुजी दरअसल सुनील जोशी है। आरएसएस ने इस हत्या के लिए सिमी को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि पुलिस आज तक हत्यारों और उनके मकसद का खुलासा नहीं कर पाई है।
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