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कचरे से पट गई खूबसूरत झील

Posted on Nov 24, 2008 at 03:46pm IST | Updated Nov 24, 2008 at 07:05pm IST

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उदयपुर। खूबसूरत झीलों का शहर उदयपुर। लेकिन अब इस खूबसूरती को ग्रहण लग गया है। ये झीलें खत्म हो रहीं हैं। ये अतिक्रमण और अवैध कब्जे का शिकार हो रहीं हैं, ये गंदे नाले में तब्दील हो रहीं हैं। इसमें धड़ल्ले से सीवर का गंदा पानी और कचरा डाला जा रहा है। हालत ये है कि छोटी-बड़ी सारी झीलें गन्दे तालाबों में बदलती जा रहीं हैं। लेकिन अनिल मेहता कई सालों से इन झीलों को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

बड़े पैमाने पर फ़ैल रही जलीय घास मछली प्रजाति के ख़त्म हो जाने और झील के पूरे परिस्थिति तंत्र ख़राब होने से ये झीलें आज मरणासन्न अवस्था में हैं। झीलों का जलग्रहण क्षेत्र है इसमें बुरी तरह से अतिक्रमण हुए हैं। इस शहर का सारा मलमूत्र इन झीलों में गिर रहा है।

इन झीलों को बचाने के लिए ये ज़रुरी है कि उनके मूल स्वरुप के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। अनिल मेहता ने इस बात को बखूबी समझते हुए स्थानीय वैज्ञानिकों से मदद लेने और नागरिकों को जागरूक करने का फैसला लिया।




अनिल ने सबके साथ मिलकर ये प्रयास किया कि झीलों के जो जलग्रहण क्षेत्र है उसका सुधार हो। झील की जो मूल सीमाएं सुरक्षित हों। झील के अन्दर जो गंदे नाले गिर रहे उन गंदे नालों को हम रोक सकें और साथ में जनता में जागृति पैदा कर सकें कि झीलों को हमें साफ़ रखना है।

लेकिन झीलों के पानी को साफ बनाए रखना अनिल मेहता के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही। उदयपुर की ज़्यादातर झीलों को जलकुम्भी खत्म कर रही थी। लेकिन एक नए तरीके के इस्तेमाल ने आशा की किरण जगाई।

अनिल ने निशुल्क आधार पर दो कीट दो कीडें बंगलोर से मंगवाए। नियोचेटीना और नियोचेटीना ब्रुसायी उन दोनों कीटों ने कोई चार या पांच 6 महीने की अवधी में यहां के जलकुम्भी का सफाया कर दिया।

लेकिन प्रथम चरण में सरकार को अनिल का ये प्रयास रास नहीं आया और इसलिए सरकार ने कुछ विभागों में जिन जलकुम्भी पर इन्होंने कीड़े छो़ड़े थे उन कीड़ों को हटा दिया। लेकिन बाद में उनको फिर से जाकर समझाया तो उन कीड़ों को फिर से छो़ड़ा गया। लेकिन झीलों के किनारे हो रहे अतिक्रमण और अवैध निर्माण की समस्या से जूझना अभी बाकी है।

झीलों के लिए जन जागरण वैज्ञानिक और तकनीकी प्रयास योजनाओं का निर्माण योजनाओं की स्वीकृति सब अनिल ने करा ली है अब ज़रूरत है जनता के सहयोग की, ताकि शहर की जनता को शीघ्र पेयजल मिल सके। पर्यटन के क्षेत्र में उन्नति हो सके और इस प्रकार हमारा जो मिशन है वो पूरा हो सके।


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