नई दिल्ली। मालेगांव धमाके के आरोप में अब तक 11 चेहरे पकड़ में आ चुके हैं। लेकिन मुंबई एटीएस के माथे पर अब भी बल पड़े हुए हैं - उसे चाहिए वो चार लोग जो 29 सितंबर को महाराष्ट्र के मालेगांव में मौजूद थे। उसी दिन मालेगांव में मौत के धमाके हुए थे जिसमें 6 लोग मारे गए थे।
पहला नाम - रामजी। समीर कुलकर्णी के अलावा ये भी मालेगांव में ही था। आईबीएन 7 को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक रामजी ने ही विस्फोटक से लदी मोटरसाइकिल मौका-ए-वारदात पर रखी। लेकिन वो अकेला नहीं था। संदीप ढांगे ने मालेगांव में हर कदम पर रामजी का साथ दिया। संदीप ढांगे का नाम साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने अपने नार्को टेस्ट में लिया है।
लेफ्टिनेंट कर्नल पी एस पुरोहित ने भी अपने बयान में संदीप ढांगे नाम के ही आदमी का जिक्र किया है। स्वयंभू शंकराचार्य उर्फ दयानंद पांडे और अभिनव भारत के खजांची अजय रहिरकर ने भी एटीएस की पूछताछ में बार-बार संदीप ढांगे का ही गुणगान किया।
ढांगे इस वक्त कहां है कोई नहीं जानता। संदीप ढांगे का नाम तो साध्वी प्रज्ञा सिंह के लैपटॉप में भी मिला है। एटीएस सूत्रों की मानें तो प्रज्ञा के लैपटॉप में इस बात के भी पुख्ता सबूत हैं कि मालेगांव धमाके के लिए बम रखने की जिम्मेदारी रामजी और संदीप ढांगे को दी गई थी।
आईबीएन 7 को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक रामजी और संदीप ढांगे के अलावा दो और लोग हैं जिनके नाम अंधेरे में हैं। ये दो अनजान चेहरे ही धमाके के लिए आरडीएक्स मालेगांव तक लेकर आए। इन्हें धमाका होने तक मालेगांव में ही रुकने को कहा गया था, सवाल ये है कि ये आदेश किसने दिया था।
पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर संदीप ढांगे जब अभिनव भारत से जुड़ा तो संगठन की ताकत कई गुणा बढ़ गई।
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