नई दिल्ली। लेफ्टिनेंट कर्नल पी एस पुरोहित ने अपने नार्को टेस्ट में अभिनव भारत के गठन, उसके कार्यों और उद्देश्यों का खुलासा किया है। पुरोहित ने जो कुछ बताया उससे साफ है कि 2006 में अभिनव भारत बनाने के बाद अगला एक साल पुरोहित ने अपना संगठन खड़ा करने में लगाया। 2007 में तमाम शहरों में बड़ी-बड़ी बैठकें भी हुईं और फिर 2008 में रची गई मालेगांव धमाके की साजिश।
पुरोहित के मुताबिक- मैंने 2006 में एक मंदिर में अभिनव भारत बनाने के बाद इसी साल सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और प्रज्ञा सिंह समेत कई लोगों को संस्था से जोड़ लिया। प्रज्ञा की मोटरसाइकिल का इस्तेमाल रामजी ही करता था। प्रज्ञा ने अभिनव भारत से लोगों को जोड़ने में काफी मदद की। हमनें दिसंबर 2006 में ही अजय राहिरकर को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया। अजय ही हवाला से आए पैसों को रामजी, समीर और मुझ तक पहुंचाता था।
सेना के रिटायर लोगों को सोची समझी साजिश के तहत अभिनव भारत से जोड़ा गया। ऐसे लोग संस्था से जुड़े कार्यकर्ताओं को हथियार और बारूद के बारे में ट्रेनिंग दे सकते थे। अभिनव भारत में सेना के रिटायर्ड लोगों और साधु-संतों को जोड़ने के बाद मैंने देश भर में बैठकों का दौर शुरू किया। 2007 में एमपी, यूपी और गुजरात के कई संतों के साथ बैठकें कीं।
इनमें से एक दयानंद पांडे था। मुंबई, दिल्ली, इंदौर और पुणे की कई बड़ी हस्तियों को भी अभिनव भारत से जोड़ा गया। अभिनव भारत से जुड़ने वालों में कुछ फिल्मी सितारे भी थे। 2007 में बैठकों के दौर के बाद अभिनव भारत ने अपने असली एजेंडे पर काम करना शुरू किया। 2007 के शुरुआती महीनों में मैंने रामजी के कहने पर संदीप ढांगे को अभिनव भारत से जोड़ा।
संदीप इलेक्ट्रिकल इंजीनियर था और वो हमारे लिए बड़े काम की चीज साबित हुआ। मई 2007 में हमनें फर्जी दस्तावेजों के सहारे कुछ हथियार खरीदे जो राकेश धावड़े, रामजी, संदीप और जगदीश महात्रे तक पहुंचाए गए। इनमें कई विदेशी पिस्तौलें, 9 एमएम की पिस्टल, 20 रिवॉल्वर, मशीन गन और विस्फोटक भी थे।
ढाई साल में दयानंद पांडे, साध्वी प्रज्ञा सिंह समेत बाकी लोगों के साथ मैंने करीब 20 बार बैठक कीं। ये बैठकें जम्मू कश्मीर, फरीदाबाद, यूपी, एमपी, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब में हुईं। मालेगांव धमाके की जानकारी गिने-चुने लोगों को ही दी गई थी। बाकी लोगों को यही बताया गया कि हम धर्म के प्रचार के लिए काम कर रहे हैं।
धमाके के लिए पैसे जुटाने के लिए समान विचारधारा वाले कुछ लोगों ने मेरी काफी मदद की। इन लोगों ने महाजनों का पैसा अभिनव भारत संस्था में लगवाया। अपने एजेंडे पर काम करते हुए मैं लगातार बड़ी हस्तियों से मिलता भी रहा। मार्च 2008 में मेरी मुलाकात मध्य प्रदेश में मुरली मनोहर जोशी से हुई। उनसे मैंने आधे घंटे तक बात की।
मैं जोशी से अभिनव भारत के बैनर तले मिला जहां अपना परिचय सेना के अधिकारी के तौर पर भी दिया। अप्रैल 2008 में मैं आरएसएस प्रमुख सुदर्शन से भी मिला। मैं आरएसएस नेता श्याम आप्टे और दिल्ली के एक डॉक्टर आर पी सिंह को भी अच्छी तरह जानता हूं। अप्रैल के महीने में ही मेरी मुलाकात वीएचपी नेता प्रवीण तोगड़िया से हुई। उनसे भी मैं अभिनव भारत के बैनर तले मिला।
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