नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) ने तीन दिसंबर से होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी पुरुष हॉकी प्रतियोगिता की मेजबानी भारत से छीन ली है। इसके पीछे पांच लाख डॉलर की उस राशि को कारण बताया जा रहा है जो उसे दिल्ली में पिछले वर्ष हुए विश्व कप के करार के तहत मिलनी बाकी है।
चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी छीने जाने के पीछे एक बडी़ वजह यह बताई जा रही है कि एफआईएच को भारतीय हॉकी महासंघ (आईएचएफ) और हॉकी इंडिया को एक साथ लाने का सरकारी फॉर्मूला मंजूर नहीं है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले की जड़ पांच लाख डॉलर की राशि है।

सूत्रों के अनुसार एफआईएच का कहना है कि उसे गत वर्ष मार्च में दिल्ली में हुए पुरुष विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट के समझौते के तहत लगभग पांच लाख डॉलर मिलनी बाकी है। सूत्रों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने इस राशि के भुगतान पर रोक लगा रखी है।
सूत्रों के अनुसार एफआईएच ने खेल मंत्रालय से पूछा है कि यह राशि क्यों रोकी गई है और एफआईएच क्या कदम उठाए कि यह राशि उसे मिल जाए क्योंकि यह राशि एफआईएच की संपत्ति है। चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी छीने जाने के पीछे इसे सबसे बडी़ वजह माना जा रहा है।
दोनों महासंघों के बीच तालमेल के सरकारी फॉर्मूले के बाद ही एफआईएच ने इस पर आपत्ति जताते हुए मेजबानी छीनने की धमकी दी थी और आज उसने मेजबानी छीनने की औपचारिक घोषणा करने के साथ कहा कि टूर्नामेंट के नए मेजबान की घोषणा एक हफ्ते के अंदर की जाएगी।
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