रायपुर। छत्तीसगढ़ में डॉक्टर रमन सिंह को जनता ने दोबारा सत्ता की कमान सौंप दी है। छत्तीसगढ़ में न तो सत्ता विरोधी लहर काम आई और न ही मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप असर डाल पाया। वहीं कांग्रेस की गुटबाजी अजीत जोगी की कोशिशों पर भारी पड़ी।
होम्योपैथिक के डॉक्टर रमन सिंह के प्रति एक बार फिर से सूबे की जनता ने विश्वास दिखाया है। शिवराज के साथ-साथ रमन सिंह ने भी छत्तीसगढ़ में विकास को चुनावी मुद्दा बनाया था। हालांकि छत्तीसगढ़ में अजित जोगी के भरोसे कांग्रेस ने अपना कद बड़ा करने की भरपूर कोशिश की।
छत्तीसगढ़ में बीजेपी को कुल 90 सीटों में से 49 सीटों पर जीत मिली। पिछले चुनाव में बीजेपी को 50 सीटें मिली थी। वहीं कांग्रेस ने 39 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसबार कांग्रेस को 2 सीटें ज्यादा मिली है। इस राज्य में भी बीएसपी ने दो सीटों पर अपना कब्जा कर लिया।
सबसे ज्यादा 41 फीसदी वोट बीजेपी के खाते में गए। जबकि कांग्रेस के खाते 40.66 फीसदी वोट पड़े। वहीं करीब सात फीसदी वोट बीएसपी को मिले।
छत्तीसगढ़ के शुरुआती नतीजे देख कर दिल्ली कांग्रेस आलाकमान की नजरें चमकी थीं। उन्हें लगा था कि चंद सीटों का फर्क जोगी अपनी बाजीगरी से पाट लेंगे। लेकिन जैसे-जैसे नतीजे आते गए अंतर बढ़ता गया और अंत में साफ हो गया कि राज्य में केवल विकास का मुद्दा रंग लाया। आतंकवाद, नक्सलवाद और नक्सलवाद से लड़ने के लिए बनी सल्वा जुदम जैसे मुद्दों को जनता से सिरे ने नकार दिया।
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