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BJP के राज में ‘अवैध खनन’ करता रहा कांग्रेसी एमएलए!

| Nov 26, 2011 at 07:10pm | Updated Nov 26, 2011 at 08:31pm

सिहोर। मध्य प्रदेश के सिहोर में अवैध खनन का एक मामला सामने आया है। इस मामले में कांग्रेस विधायक संजय पाठक निशाने पर हैं। पाठक पर आरोप है कि चार साल पहले लीज रद्द होने के बाद भी वो खदानों से मनमाने तरीके से खुदाई करते रहे। कई साल तक चुप्पी साधने के बाद अब आला अधिकारियों ने इसे लेकर मामला दर्ज किया है।

नियमों की धज्जियां उड़ाकर उवैध खुदाई का यह काम सिर्फ इसलिए चलता रहा क्योंकि इन खदानों के खेल में पूर्व मंत्री के बेटे और कांग्रेस विधायक संजय पाठक शामिल हैं। विधायक की कंपनी निर्मला मिनरल्स और आनंद माईनिंग कॉर्पोरेशन की लीज साल 2007 में ही ख़त्म हो गई थी लेकिन बावजूद इसके अवैध खनन का सिलसिला जारी है। बावजूद इसके खनिज महकमे के अफसरों की जुबान पर ताले बड़े हैं।

इलाके में आयरन ओर और ब्लू डस्ट खनन के लिए संजय पाठक का परिवार 1922 से ही माइनिंग के इस बिजनेस में लगा है। ऐसे में संजय पाठक के मुताबिक जब तक लीज़ रद्द नहीं होती तब तक कंपनी का माईनिंग का हक रहता है।

बताते चलें कि सिहोर इलाके की इन खदानों में पहले भी विवाद हुआ तब 28 जून 2003 में अपने शासन के आखिरी समय में कांग्रेस की दिग्विजय सरकार जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंची की ये जमीन राजस्व भूमि है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी सेन्ट्रल इम्पॉवर्ड कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार का ये फैसला कन्ज़र्वेशन एक्ट औऱ सुप्रीम कोर्ट के 1996 के आदेश का उल्लंघन है।

हैरानी की बात ये है कि राज्य का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड न सिर्फ इसके बावजूद परमिशन जारी करता रहा। बल्कि IBN7 के पास मौजूद दस्तावेज के मुताबिक पिछले चार साल से अवैध खनन जारी है।

जबलपुर के सिहोरा इलाके की इस जमीन में आयरन ओर का बेहिसाब खजाना है इसी वजह से खनिज माफिया की नजर इस पर गड़ी रहती है। यही नहीं खनन को लेकर पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड की सम्मति को भी ताक पर रखा गया और ज्यादा मात्रा में खनन किया गया। साल 2009 औऱ 2010 में 4,60,000 टन के खनन की इजाज़त थी लेकिन अंधाधुंध तरीके से 19,80,488 टन खनिज निकाला गया और इसकी बकायदा रॉयल्टी भी सरकार के पास जमा की गई।

देर से ही सही, पर्यावरण बोर्ड और खनिज विभाग ने ज्यादा खुदाई करने के लिए खदानें बंद करने का आदेश निकाल दिया। साथ ही जल औऱ वायु अधिनियम में मामला दर्ज कर लिया है। बोर्ड ने अदालत के दरवाज़े भी खटखटा दिये हैं। एक्ट में डेढ़ साल से छह साल की सज़ा औऱ जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन लीज़ रिन्यु होने से पहले ही चार साल में जो करोड़ों रूपये का खनन किया गया, उनकी वसूली कौन करेगा।

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