अहमदाबाद। देश में लगातार हो रही आतंकी वारदातों से अहमदाबाद के लोग काफी डरे हुए हैं। लोगों को सताने लगा है कि वो कहीं भी महफूज नहीं हैं। इस वजह से 40-45 साल के लोग भी वसीयतनामा बनाने लगे हैं। पिछले कुछ समय में ये तादाद कई गुना बढ़ गई है।
आमतौर पर लोग वसीयतनामा उम्र के आखिरी पड़ाव में बनवाते हैं। लेकिन बढ़ती आतंकी वारदातों के चलते लोग असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। इस वजह से ये ट्रेंड बदलने लगा है।
55 साल के दीपक भाई गांधी बैंक में अफसर थे। कुछ ही समय पहले उन्होंने वीआरएस लिया है। पत्नी नहीं है। एक बेटी है जो ससुराल में है। मुंबई में हुए आतंकी हमलों ने उन्हें हिला कर रख दिया है। उन्हें लगने लगा है कि उनके साथ कहीं भी कुछ भी हो सकता है। इसलिए वो चाहते हैं कि कड़ी मेहनत से जो जायदाद उन्होंने जुटाई है, उसका सही उपयोग हो। वहीं पेशे से सीए रहे मनीषभाई की हालत भी दीपकभाई जैसी है। वो नहीं चाहते कि उनके साथ कुछ ऐसा वाकया जाए। जिसके बाद उनके परिवार को दिक्कत हो। इस डर ने उन्हें वसीयतनामा बनवाने पर मजबूर कर दिया है।
अहमदाबाद के सेशंन कोर्ट में नोटरी का काम करने वाले प्रदीपभाई का कहना है कि उनके पास हर रोज छह-सात लोग वसीयत के बारे में पता करने आते हैं। जबकि पहले दो-तीन महिने में इतने लोग आते थे। इसके अलावा अहमदाबाद बार एसोसिएशन की मानें तो वसीयतनामा बनवाने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। पहले ये ट्रेंड देखने को नहीं मिलता था।
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