नई दिल्ली। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री अब्दुल रहमान अंतुले ने महाराष्ट्र एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे की शहादत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतुले उनकी मौत की जांच कराना चाहते हैं। उन्होंने करकरे की मौत पर कई सवाल उठाए हैं।
अंतुले ने बुधवार को संवाददाताओं से चर्चा में कहा कि मुझे संदेह है कि 26 नवंबर को करकरे की हुई मौत के पीछे आतंकवाद ही कारण है। यह मामला मालेगांव विस्फोट की जांच से भी जुड़ा हो सकता है।
अंतुले ने कहा कि ऊपरी तौर पर आतंकवादियों द्वारा करकरे की हत्या करने का कोई कारण नहीं दिखाई देता। करकरे आतंकवाद के शिकार हुए या आतंकवाद के साथ कुछ और भी कारण थे, मैं नहीं जानता।
अंतुले ने कहा कि जितनी चीजें आंखों के सामने होती हैं, उसके पीछे उससे कहीं ज्यादा चीजें छुपी हुई होती हैं।
अंतुले की इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे एक घृणित टिप्पणी की संज्ञा दी और इस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से स्पष्टीकरण की मांग की।
अंतुले ने सदन के बाहर कहा कि वो आतंकवादी थे। वो ये नहीं जानते कि कि सामने कौन है लेकिन उनके पास करकरे को मारने की कोई वजह नहीं थी। मान लिया जाए कि वे एंटी हिंदू थे तब सीएसटी स्टेशन पर जो लोग मरे उनमें 40 मुसलमान कैसे हैं। आतंकी ये नहीं देखते कि सामने कौन है लेकिन करकरे ऐसे आदमी नहीं थे जिसे वे नहीं जानते थे। वो सारी तैयारी के साथ आए थे। वे सारी बातें जानते थे लेकिन उन्होंने करकरे को बचाया नहीं।
अंतुले का ये बयान आतंकी अजमल कसाब के कबूलनामे पर भी सवाल खड़े कर रहा है क्योंकि कसाब कबूल चुका है कि उसपर करकरे और उनके साथियों ने फायर किया था लेकिन कसाब के साथी इस्माइल ने उन्हें अपनी एके47 से निशाना बना लिया। गौरतलब है कि 26 नवंबर को मुंबई में हुए हमले में करकरे के साथ एसीपी अशोक काम्टे और इंस्पेक्टर विजय सालस्कर भी शहीद हो गए थे।
करकरे के इस बयान को विपक्ष ने मुद्दा बना लिया है। संसद में हुई बहस के दौरान शिवसेना सांसद अनंत गीते ने कहा कि जब प्रधानमंत्री तक कह चुके हैं कि करकरे आतंकियों की गोली से मारे गए हैं, तो फिर कैसे उनका कोई मंत्री ऐसा सवाल उठा सकता है। प्रधानमंत्री को इसका जवाब देना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा, "यह टिप्पणी घृणित है और बेहद गैर जिम्मेदाराना भी। इस पर प्रधानमंत्री को स्पष्टीकरण देना चाहिए।" भाजपा की ही नजमा हेपतुल्ला ने भी अंतुले के बयान की निंदा की।
अंतुले के बयान को समाजवादी पार्टी (सपा) के महासचिव अमर सिंह ने भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया। अमर सिंह ने संसद परिसर में संवाददाताओं से चर्चा में कहा कि करकरे की शहादत के बारे में सवाल उठाना पुलिस बल के मनोबल को गिराने वाला है। मानवाधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और गलत तरीके से कार्रवाई हो तो विरोध भी होना चाहिए। बटला हाऊस मुठभेड़ के बाद मेरे अंदर यह साहस नहीं रहा कि मुंबई हादसे पर कुछ बोलूं। ऐसे मसलों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
हंगामे के बीच अंतुले ने सदन में सफाई दी कि उन्होंने ये नहीं कहा कि हेमंत करकरे को आतंकवादियों ने नहीं मारा, बल्कि जिस परिस्थिति में उनकी मौत हुई, वे उस पर सवाल उठा रहे थे। आखिर कौन सी ऐसी परिस्थिति थी जिसकी वजह से हेमंत करकरे समेत तीन आला अफसर एक ही गाड़ी में, एक ही जगह पहुंचे जबकि ये प्रोटोकॉल के खिलाफ था।
अंतुले ने कहा कि आखिर वो कौन था जिसने तीनों अफसरों से कामा अस्पताल जाने को कहा जबकि हमला ताज और ओबरॉय होटल पर हुआ था। ये आदेश किस परिस्थिति में दिया गया इसकी जांच होनी चाहिए।
उधर, कांग्रेस ने अंतुल के बयान से अपना पल्ला झाड़ लिया है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि कांग्रेस अंतुले के बयान से सहमत नहीं है। यह उनकी निजी राय हो सकती है। अंतुले का यह बयान क्या बताता है राय दें।
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