नई दिल्ली। मुंबई का हमलावर कसाब तीन महीने तक एक कमरे में जानवर की तरह बंद रहा। सिर्फ वही नहीं उसके साथ 9 और लोग भी बंद रहे। उनके आकाओं को उनपर भरोसा नहीं था। लश्कर-ए-तैयबा के एक कैंप में तीन महीने तक एक छोटा सा कमरा उनका घर बन गया था। उनका बाहर आना-जाना भी महज कुछ ही पलों के लिए था। क्योंकि लश्कर के आका मिशन मुंबई को पूरी तरह से फुल प्रूफ बनाना चाहते थे।
वो नहीं चाहते थे कि मुंबई पर हमला करने के लिए तैयार दसों आतंकी सपने में भी अपने मिशन का जिक्र कर दें। उन्हें कमरे में ही मुंबई के चप्पे-चप्पे से वाकिफ करवाया जाता था। लेकिन वो कमरे से बाहर न निकल पाएं इसका पूरा इंतजाम किया गया था।
अकेले बचे हुए जिंदा आतंकवादी ने लश्कर के इस वहशीपन का सनसनीखेज खुलासा किया है। इसकी जानकारी महाराष्ट्र के गृह मंत्री जयंत पाटिल ने विधानसभा ने दी।
लश्कर का इन दसों आतंकियों पर बिल्कुल यकीन नहीं था। इसकी एक बानगी ये भी है कि जिस अल हुसैनी जहाज से इन्हें कराची से लेकर चला गया उसमें भी इन्हें एक रूम में ही बंद कर दिया गया। इन्हें किसी से बात करने की इजाजत भी नहीं थी। अल हुसैनी में ये मुंह सिले हुए बैठे थे। इन्होंने पूरे सफर के दौरान आपस में या फिर अल हुसैनी के क्रू से कोई बातचीत नहीं की।
गृहमंत्री जयंत पाटील में मुंबई में हुए हमले की जानकारी बुधवार को विधानसभा में दी। पाकिस्तान में इन आतंकवादियों को कैसे ट्रेनिंग दी गई, आतंकी मुंबई कैसे पहुंचे और मुंबई में आने के बाद कैसे एक-एक जगह को उन्होंने निशाना बनाया और पुलिस ने कैसे कार्रवाई की। इसकी पूरी जानकारी जयंत पाटील नें सभागृह को दी, जिसमें कई चौंकानेवाली बातें सामने आयी हैं।
आतंकियों के आका चाहते थे कि इस हमले को इतना खतरनाक बना दिया जाए कि मुंबई में हर तरफ लाशें ही नजर आएं। इसके लिए पूरा ब्लूप्रिंट बनाया कि कैसे-कैसे कौन आतंकी कहां हमला करेगा और बम रखेगा। यही नहीं बम फटने का टाइम भी अलग-अलग रखा गया। ताकि वो जब सीएसटी, ताज, ओबऱॉय और नरीमन पर लोगों को बंधक बना कर बैठे हों तो अचानक बाहर मुंबई विस्फोटों से दहल जाए।
ताज और गेटवे ऑफ इंडिया के बीच हमले के दौरान ही एक बम रखा इसमें उन लोगों ने चार घंटे 57 मिनट बाद का टाइमर लगाया था। इसके अलावा इन लोगों ने लियोपॉल्ड रेस्तरां में भी एक बम रखा। ये बम टिफिन में था। एक बम इन लोगों ने ताजमहल होटल के पीछे रखा। यही नहीं विस्फोटकों से भरा एक बैग इन लोगों ने होटल ओबरॉय में भी रख दिया। सीएसटी स्टेशन पर भी इन लोगों ने बम का एक बैग छोड़ दिया। इनका मकसद एक ही था। जैसे ही उनके हमले के बाद अफरातफरी मचे बम भी फटना शुरू हो जाएं। होटल के बाहर भी बम रखने के पीछे इनकी यही मंशा थी। इन्हें उम्मीद थी कि उनके हमले के बाद होटल के बाहर भीड़ इकट्ठा होगी और उसके बाद उनके रखे बम में विस्फोट हो जाएगा। लेकिन मुंबई के लोगों की किस्मत उतनी बुरी नहीं थी उनके सारे बम नहीं फटे।
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