बांदा। हम सब अपने आसपास हो रही गड़बड़ियों को अकसर देखते हैं, लेकिन उनके खिलाफ़ आवाज़ उठाना अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते। लेकिन आईबीएन7 के सिटीज़न जर्नलिस्ट कामता प्रसाद मिश्र ने सरकारी नौकरी करते हुए भी अपने ही विभाग के भ्रष्ट लोगों के खिलाफ़ आवाज़ उठाई। उनके लिए मुश्किलें पैदा की गईं, लेकिन वो फिर भी अटल रहे और उनकी कोशिशों से एक बड़ी धांधली से पर्दाफाश हुआ है।
कामता मिश्र कारीधारड़ी पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। इनको शिक्षा विभाग में लंबे समय से खुलेआम हो रहे भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं हुआ। और इन्होंने सिटीज़न जर्नलिस्ट बनने का फैसला किया है ये जानने के लिए कि आखिर गुनहगारों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती।
दरअसल सरकारी स्कूलों की बदहाली के खबरें अकसर आती हैं, लेकिन सच तो ये है कि सरकार इन स्कूलों और यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराती है। लेकिन भ्रष्ट अधिकारी बच्चों के लिए आए पैसे बेझिझक हड़प जाते हैं।

इन धांधली पर मेरी नज़र लंबे समय से थी। 12 जून 2010 को कामता ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव-बेसिक शिक्षा और शिक्षा निदेशक–बेसिक को पत्र लिखकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। जिसके बांदा के तत्कालीन जिला कलेक्टर ने शिकायत पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एस आर लिंगम से जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए गए। स्कूलों के लिए आए पैसा का दुरुपयोग हुआ है। इसके बाद जिला कलेक्टर और फिर आयुक्त महोदय ने भी प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को एक पत्र को भेजकर आरोपियों के खिलाफ़ कार्रवाई की बात कही। लेकिन पैसे के दम पर ये मामला दबा दिया गया।
सीजे की टीम जब इस मामले में बीएसए से बात की तो बीएसए का दावा है कि कोई धांधली हुई ही नहीं। उसके बाद सीजे ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। जिलाधिकारी ने भरोसा दिया है कि गुनहगारों के खिलाफ़ कार्रवाई होगी और साथ ही पैसे की वसूली भी की जाएगी।
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