IBN7 IBN7

[+] 6 और खबरें

गरीबों को मनरेगा हो या बीपीएल, नहीं मिलता सही हक

Posted on Jan 13, 2012 at 03:04pm IST | Updated Jan 13, 2012 at 05:26pm IST

पटना। सरकार गरीबों के लिए तमाम योजनाएं बनाती है, जो अगर ठीक ढंग से लागू की जाएं तो वाकई चमत्कारी बदलाव लाए जा सकते हैं। लेकिन अफसोस ये कि ये योजनाएं जरूरतमंदों तक पहुंचती ही नहीं है। उनके हक का पैसा बीच में ही डकार लिया जाता है, और उनके हिस्से आती है सिर्फ गरीबी। सीजे की टीम ने बिहार के एक गांव का दौरा किया और जहां दो ग्रामीण सीजे बनकर अब इंसाफ़ की गुहार लगा रहे हैं।

राज्य की राजधानी पटना से महज़ 45 किलोमीटर की दूरी पर चियनतार गांव है यहां के लोग ख़ामोशी से बदहाल ज़िंदगी जीने को मजबूर हैं। 2000 की आबादी वाले इस गांव में ज्यादातर लोग पिछड़ी जातियों के हैं। सरकारी योजनाओं का फ़ायदा यहां के लोगों तक नहीं पहुंच ही नहीं पाता है। आईबीएन7 के सिटीजन जर्नलिस्ट बने जगमोहन महतो गांव के और पुरुषों की तरह ही रेत खनन का काम करते हैं। दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद ये 100 से 150 रुपए कमा पाते हैं। लेकिन परिवार के पांच सदस्यों के लिए ये काफी नहीं है। ये काम सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत हो रहा था। मनरेगा के तहत इन्हें जॉब कार्ड मिलना था और साथ 100 दिन का काम और हर दिन के काम के एवज़ में 100 रुपए मिलने थे।

गरीबों को मनरेगा हो या बीपीएल, नहीं मिलता सही हक
जगमोहन को जॉब कार्ड तो मिल गया, लेकिन काम नहीं मिला। दो महीने बाद इनका जॉब कार्ड भी मुखिया के बेटे ने वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि जब सरकार हमारे गांव में कोई प्रोजेक्ट शुरू करेगी तो वे मुझसे संपर्क करेंगे। लेकिन उसके बाद काम नहीं मिला।

जगमोहन का कहना है कि पिछले साल सितंबर महीने में एक समाज सेवी उनके गांव में आए और उन्होंने कंप्यूटर पर मनरेगा की साइट दिखाई। जिस देखकर जगमोहन दंग रह गए। उस पर लिखा था कि जगमोहन पिछले तीन साल से अलग-अलग सरकारी योजनाएं के तहत काम कर रहा है। रिकार्ड में ये भी लिखा था कि उन्हें वक्त पर पूरा पैसा भी मिलता रहा है। साइट पर दिखाया गया है कि उन्हें तकरीबन 8000 रुपए का भुगतान किया जा चुका है जो बिल्कुल झूठ है।

सीजे टीम की मदद से जगमोहन ने मुखिया के बेटे से जवाब मांगा। उसने किसी भी तरह की धांधली से साफ़ इनकार किया और उल्टा उनपर दोष डाला दिया। जिसके बाद उन्होंने प्रोजेक्ट अफसर रश्मि रंजन से मुलाकात की। सीजे की रिपोर्ट ये साफ़ करती है किस तरह मनरेगा में खुले आम धांधली हो रही है। लेकिन ये सिर्फ़ मनरेगा की कहानी नहीं है बल्कि हर सरकारी योजना इसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है।

इसी गांव की रहनेवाली धनरजिया देवी के परिवार में 12 लोग हैं। धनरजिया के पति और बेटा ही सिर्फ़ कमाने वाले हैं। इनका पूरा परिवार बीपीएल कार्ड से मिलने वाले राशन पर निर्भर है। लेकिन इन्हें राशन कभी भी समय पर नहीं मिलता है। डीलर अपनी मर्जी से दुकान खोलता है, और वो ज्यादा पैसा वसूलता है। दुकान पर ज्यादातर रेट लिस्ट भी नहीं लगी होती है।

दरअसल बीपीएल स्कीम के तहत इस परिवार को हर महीने 14 किलो गेहूं 2 रुपए प्रति किलो की दर से और 21 किलो चावल 3 रुपए प्रति किलो के कीमत से, यानी कुल मिलाकर 35 किलो मिलने हैं। लेकिन डीलर अकसर इन्हें सिर्फ 30 किलो चावल या गेहूं लेने के लिए कहता है और वो भी ज्यादा कीमत पर। यही नहीं, राशन की दुकान महीने में सिर्फ़ एक दिन खुलती है। जिस दिन सीजे की टीम दुकान पर पहुंची तो राशन बंट रहा था, लेकिन अगले ही दिन ये बंद हो गया।

धनरजिया का कहना है कि वो लोग राशन डीलर से बहस नहीं कर सकते क्योंकि अनाज के लिए उस पर निर्भर हैं। मुखिया को इन लोगों की परेशानी मालूम है, लेकिन वो भी इसे नज़रअंदाज़ करते हैं। सीजे टीम स्कीम के मार्केटिंग अफसर शशिभूषण कुमार से मिली। ये परिवार आईबीएन7 की सीजे टीम के माध्यम से अपनी हक को मांग रहा है।


(IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!)


(अब IBN7 देखिए अपने आईपैड पर भी। इसके लिए IBNLive का आईपैड एप्स डाउनलोड कीजिए। बिल्कुल मुफ्त!)

IBNKhabarMore on: bpl, manrega, bihar, patna, scam, cj



पिछली खबर
चंडीगढ़:पार्किंग विवाद में युवक की पीट पीटकर हत्या
अगली खबर
पंचकूला MMS कांड की आरोपी लड़की की मां-बहन की हत्या

IBN7IBN7
IBNLiveIBNLive
IBNLive IBNLive

कमेंट्स

0

  
अपना कमेंट भेजें

नाम *

 

सिटी *

ईमेल *

     

कमेंट्स *


IBN7IBN7
IBN7

सिटिज़न जर्नलिस्ट में ये भी

कानपुर में मैली गंगा को बचाने में जुटे मोनिका-ब्रजेंद्र

गंगा को साफ करने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं तैयार की जाती है, लेकिन हम भूल जाते हैं उन छोटी नदियों को जिनकी वजह से ये गंगा और यमुना जैसी बड़ी नदियां प्रदूषित हो रही है। 21:21 PM, May 21, 2012

12 सालों से जुटा है गंगा की सफाई में, जुड़ने लगे लोग

इलाहाबाद से सिटीजन जर्नलिस्ट देवानंद शुक्ल गंगा में प्रदूषण को रोकने के लिए तमाम सरकारी योजनाओं का हश्र देखकर सिस्टम को कोसने के बजाए खुद आगे आ गए। 21:19 PM, May 21, 2012

गंगा की सफाई के लिए सीजे पूजा ने अपनाया अनोखा तरीका

जीवन दायिनी मां गंगा की पूजा हम सभी करते हैं। अपने पापों को धोने के लिए पवित्र पावनी गंगा में गोता भी लगाते हैं। 21:14 PM, May 21, 2012

जल को जहर बनाने वाली फैक्ट्रियों पर भ्रष्टतंत्र चुप क्यों?

भारती जाटव रतलाम की कालोनी में रहती हैं। इस इलाके में पानी के लिए संघर्ष पिछले कई साल से होता आ रहा है। ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि इलाके में लगा हैंडपंप अब पानी नहीं लाल रंग का जहर उगल रहा है। 16:15 PM, Apr 03, 2012

स्कूल के नाम पर विधायक निधि ही डकार गए भ्रष्टाचारी!

गाजीपुर जिले की भाला ग्राम सभा में एक स्कूल के नाम पर फ़र्ज़ी ढंग से विधायक फंड से हजारों रुपए निकाल लिए गए और किसी को इस भ्रष्टाचार की भनक तक नहीं लगी। 15:58 PM, Apr 03, 2012

महंगा कर्ज लेने को मजबूर हैं मोतिहारी के किसान!

प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटी (पैक्स) किसानों का एक संगठन है। हर 5 साल में इसके लिए चुनाव होते हैं। 14:46 PM, Apr 03, 2012
IBN7