नई दिल्ली। लालकृष्ण आडवाणी भले ही प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हों लेकिन चुनावी मौसम में बीजेपी के लिए अब भी सबसे बड़ा चेहरा अटल बिहारी वाजपेयी ही हैं। वाजपेयी खुद चुनाव प्रचार करने की स्थिति में नहीं हैं लेकिन पांच राज्यों के चुनावों के लिए पार्टी की तरफ से तैयार की गई प्रचार सामग्री में हर जगह पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ही छाए हुए हैं।
वाजपेयी की तबीयत ठीक नहीं है। वो चुनाव प्रचार नहीं कर सकते। लेकिन बीजेपी अपने सबसे लोकप्रिय चेहरे के भरोसे ही पांच राज्यों के चुनाव खासकर उत्तर प्रदेश का चुनाव पार लगाने की कोशिश में है। पार्टी की चुनाव सामग्री में हर जगह सिर्फ वाजपेयी ही दिख रहे हैं। हो भी क्यों न बीजेपी भी जानती है कि आज भी अगर कोई एक चेहरा पार्टी के लिए वोट जुगाड़ सकता है तो वो वाजपेयी ही हैं।

वाजपेयी का करिश्मा कुछ ऐसा है कि पार्टी के सबसे बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी भी उन्हें टक्कर नहीं दे पा रहे। प्रचार सामग्री में वाजपेयी के सामने आडवाणी का कद छोटा दिख रहा है तो कई पोस्टर्स और बैनर से आडवाणी गायब हैं। इसके पीछे वजह भी है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आज भी बीजेपी के सबसे स्वीकार्य चेहरे हैं। राजनैतिक तौर पर उन्हें कभी कट्टर नहीं माना गया। यहां तक कि विरोधी उन्हें बीजेपी का मुखौटा भी कहते रहे। बदलते दौर में युवा वोटर उदार और मध्यममार्गी नेताओं को पसंद करता है। बीजेपी जानती है कि अपनी इसी छवि की वजह से वाजपेयी एक बड़े वोट बैंक को आकर्षित करते हैं। दूसरा कोई नेता वाजपेयी की बराबरी नहीं कर सकता।
बीजेपी के लिए ये चुनाव आसान नहीं हैं। दो राज्यों में सत्ता गंवाने का खतरा है तो उत्तर प्रदेश में चारों ओर से कांटे की टक्कर है। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि वाजपेयी और उनके नाम पर सुशासन का नारा बीजेपी के कितने काम आएगा।
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