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सीजे बने तो हुई कार्रवाई वरना FIR का भी पता न होता!

Posted on Jan 24, 2012 at 01:54pm IST | Updated Jan 25, 2012 at 01:19pm IST

नोएडा। गौरव बख्शी नोएडा के एक रजिस्ट्री ऑफिस में हो रहे भ्रष्टाचार का सच सामने लाने के लिए सिटिज़न जर्नलिस्ट बने। गौरव के संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने अपनी गोद ली बेटी के पिता के तौर पर अपना नाम रजिस्ट्रार के दफ्तर में दर्ज कराना चाहा। सब रजिस्ट्रार ने उनसे रिश्वत की मांग की। गौरव बख्शी ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया और इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया।

गौरव अपने पिता के साथ उन कर्मचारियों के पास गए जिन्होंने रिश्वत की मांग की थी और बातचीत को कैमरे पर रिकॉर्ड कर लिया। जब उन्होंने ये वीडियो अधिकारियों को दिखाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई तो उनके और उनके पिता के साथ मारपीट की गई।

सीजे बने तो हुई कार्रवाई वरना FIR का भी पता न होता!

ये तो सिर्फ शुरुआत थी। गौरव ने फिर एफआईआर दर्ज कराई लेकिन दो महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब गौरव को अहसास हुआ कि उन्हें जनता की मदद की जरूरत पड़ेगी। रजिस्ट्रार के दफ्तर के बाहर एक धरना प्रदर्शन किया गया।




पुलिस ने गौरव और कुछ और लोगों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उनकी पहली शिकायत के खिलाफ अभी भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। सीजे टीम के साथ गौरव तत्कालीन एसएसपी अमिताभ यश से मिले। गौरव की खबर का असर हुआ। एक कर्मचारी को रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित किया गया।


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