चंडीगढ़। पंजाब-उत्तराखंड में पिछले एक महीने से चल रहा हाई वोल्टेज चुनाव प्रचार थम गया है। नेताओं ने एक-दूसरे को इस दौरान जमकर कोसा। पहली बार सभी पार्टियों ने सिर्फ और सिर्फ विकास के मुद्दे पर वोट मांगे। अब जनता जनार्दन के फैसले की बारी है। 30 जनवरी को तय होने वाला है कि पंजाब और उत्तराखंड में सत्ता का ऊंट किस करवट बैठता है।
117 विधानसभा सीटों वाले पंजाब में कुल 1077 उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला सत्ताधारी अकाली-बीजेपी गठबंधन और कांग्रेस के बीच है। लेकिन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत बादल की पंजाब पीपुल्स पार्टी के मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इस तीसरे मोर्चे में वामपंथी दल और अकाली दल लोंगोवाल जैसी पार्टियां भी शामिल हैं। खुद मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ इस बार उनके ही दो भाई मैदान में हैं। चचेरे भाई महेश इंदर बादल के साथ-साथ उन्हें अपने खास छोटे भाई गुरदास बादल से भी दो-दो हाथ करने पड़े।

पंजाब के साथ-साथ उत्तराखंड में भी चुनावी शोर थम गया है। प्रचार के आखिरी दिन कांग्रेस और बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। भाजपा ने जहां अरुण जेटली, सीएम बी सी खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक और भगत सिंह कोश्यारी को प्रचार के लिए उतारा तो कांग्रेस की तरफ से शीला दीक्षित, गुलाम नबी आजाद, मोहम्मद अजहरुद्दीन, राशिद अल्वी, सी पी जोशी, विजय बहुगुणा और हरीश रावत ने कमान संभाली।
बीजेपी राज में हुए भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर कांग्रेस उत्तराखंड में वोट मांग रही है हालांकि पार्टी ने राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा पेश नहीं किया है। राज्य में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही है। हालांकि बीएसपी ने भी राज्य की सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। चुनावी शोर थमने के बाद अब कई उम्मीदवार गांवों में मतदाताओं के घर दस्तक देने के लिए कई-कई किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकल चुके हैं।
(IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!)
More on: punjab election 2012, uttarakhand election 2012








कमेंट्स
0