जयपुर। राजस्थान में गद्दी संभालने के एक अर्से बाद गहलोत सरकार को अल्पसंख्यक समुदाय की याद आ ही गई। पिछड़ापन दूर करने के लिए राज्य अल्पसंख्यक आयोग के जरिए छात्रों को स्कॉलरशिप देने का एक खाका तैयार किया है। इसके मुताबिक अल्पसंख्यक समुदाय का जो भी छात्र स्कूल और कॉलेज जाता है उसे छात्रवृति दी जाए। वो भी बगैर मेरिट और अंकों के पैमाने के। इसे लेकर आयोग ने गहलोत सरकार और केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग को सिफारिश की है।
आयोग ने छात्रवृति का पैटर्न अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को मिल रही सुविधा के मुताबिक किया। बीजेपी इसे यूपी चुनाव से जोड़कर देख रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समाज को तोड़ने की काम कर रही है, अगर स्कोलपशिप दी गई तो पार्टी आंदोलन करेगी।

लेकिन आयोग का कहना है कि ये फैसला मुसलमानों की रिझाने के लिए नहीं किया गया। वहीं कांग्रेस के मुताबिक राज्य अल्पसंख्यक आयोग के इस फैसले का वास्ता न चुनाव से है और न ही अल्पसंख्यक वोट बैंक से। मालूम हो कि गोपालगढ़ दंगों में हुए प्रशासनिक अमले की चूक की वजह से गहलोत सरकार काफी किरकिरी झेल रही है। 3 महीने पहले ही जयपुर में विरोध प्रदर्शन कर गहलोत के खिलाफ मुस्लिम संगठनों ने मोर्चा भी खोल दिया था। ऐसे में गहलोत सरकार का ये कदम अल्पसंख्यक तृष्टिकरण की रणनीति ही लग रही है। हालांकि कम से कम इसी बहाने राज्य के अल्पसंख्यक छात्रों के लिए बेहतर शिक्षा का एक प्लेटफॉर्म तो मुहैया हो पाएगा।
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