रंजीव मसंद
मुंबई। जाने माने टीवी सीरियल 'ऑफिस ऑफिस' से मिलते जुलते प्लॉट पर बनी फिल्म 'गली गली चोर है' को निर्माता ने बड़े ही नेक इरादों से बनाया है। लेकिन कहना पड़ेगा कि ये बड़ी ही बोर फिल्म है। फिल्म में आम आदमी की रोजमर्रा में हो रहे भ्रष्टाचार से लड़ाई के बारे में दिखाया गया है।
अक्षय खन्ना भारत के किरदार में हैं जो भोपाल में एक मिडिल क्लास कैशियर की तरह काम करते हैं। वो परेशानी में तब फंस जाते हैं जब वो अपने घर का एक खाली कमरा एक लोकल नेता को अपना ऑफिस बनाने के लिए देने को मना कर देते हैं। नतीजा ये कि अपने घर से पंखा चोरी होने पर उन्हें पूरी न्याय व्यवस्था से जूझना पड़ता हैं। ऐसे में वो खुद को रिश्वतखोरी के जाल में फंसा हुआ पाता है।

आखिरी में यही कहा जा सकता है कि ये बहुत ही बोर फिल्म है। रंजीव मसंद ने निर्देशक रूमी जाफरी की गली गली चोर है को पांच में से दो स्टार दिए हैं। यहां तक की पाकिस्तानी स्टार वीणा मलिक का एक घटिया सा आइटम गाना भी आपको जगा नहीं पाएगा।
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