नई दिल्ली। 2जी मामले में 122 लाइसेंसों के खारिज किए जाने के फैसले के बाद अगली रणनीति तैयार करने के लिए दूरसंचार कम्पनियों ने नामी गिरामी वकीलों और कानूनी सलाहकार कम्पनियों को नियुक्त किया है। वरिष्ठ वकीलों का हालांकि यह मानना है कि फैसले में कोई बदलाव की नगण्य सम्भावना है।
वकील समुदाय के बीच उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2जी मामले की सुनवाई के दौरान सलाह देने के लिए टाटा टेलीसर्विसेज और एलियांज इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड ने हरीश साल्वे को नियुक्त किया है। आइडिया ने सी एस वैद्यनाथन को बरकरार रखा है, जबकि लूप ने अर्यामा सुंदरम को नियुक्त किया है।

इसके अलावा कम्पनियों ने हम्मूराबी और सोलोमन, अमरचंद मंगलदास, जे सागर एंड एसोसिएट्स एंड करंजावाला एंड कम्पनी जैसी कानूनी सलाहकार कम्पनियों की भी सेवा ले रखी है। दूरसंचार कम्पनी आइडिया के एक बयान में कहा गया कि उसे सिर्फ इसलिए दंडित किया गया, क्योंकि उस 18 महीने बाद लाइसेंस जारी किया गया था। बयान में कहा गया कि हम सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर विचार करेंगे और अपने निवेश की सुरक्षा की सम्भावना तलाशेंगे।
यूनीनोर में निवेश करने वाली नॉर्वे की कम्पनी ने एक बयान में कहा कि टेलीनोर समूह चाहता है कि यूनीनोर का संचालन जारी रहे। हमारी मंशा देश में हमारे कानून सम्मत निवेश को बचाने के लिए लड़ने की है।
कुछ कानूनी जानकारों का हालांकि कहना है कि फैसले में बदलाव होने की कम ही सम्भावना है। वैद्यनाथ ने कहा कि समीक्षा याचिका पर कई बार सुनवाई नहीं होती है। उन्होंने कहा कि जहां तक उपचारात्मक याचिका का सवाल है। इस पर सुनवाई तभी होती है, जब आपके पास इस बात का पुख्ता आधार हो कि आपको सुनवाई का मौका नहीं मिला और आपके प्राकृतिक न्याय के अधिकार का उल्लंघन हुआ।
उन्होंने कहा कि इस मामले में यह स्थिति नहीं है। इसलिए कम्पनियों के लिए मुनासिब यही है कि वे वाजिब प्रक्रिया (स्पेक्ट्रम की नीलामी) में शामिल हों।
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