अहमदाबाद। 2002 के दंगों में धार्मिक स्थलों को हुए नुकसान के एक मामले में याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने गुजरात सरकार पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि सूबे की सरकार ने 2002 में अपने दायित्वों का निर्वहन सही से नहीं किया। उसकी निष्क्रियता के चलते ही दंगे बढ़े। साथ ही कोर्ट ने धार्मिक स्थलों के नुकसान पहुंचाए जाने पर सरकार को मुआवजा देने को कहा।
कोर्ट में आईआरसीजी इस्लामिक रिलीफ कमेटी ने साल 2002 दंगा मामले में साल 2003 में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में मांग की गई थी कि दंगों के दौरान जो धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचा था। उसका मुआवजा राज्य पीड़ितों को दे। इस पर आज कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि पीड़ित पक्ष इस संबंध में निचली अदालत में दो महीने के भीतर एक याचिका दाखिल करे और जिस पर 6 महीने की सुनवाई को बाद कोर्ट मामले को हाईकोर्ट के पास भेजेगा। राज्य सरकार को इन अर्जियों पर कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट ने आदेश में कहा कि धार्मिक स्थलों की नुकसान की भरपाई सरकार को करनी होगी।
कोर्ट ने कहा कि सोची समझी साजिश के तहत धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने दंगे के दौरान क्षति पहुंचे 572 धार्मिक स्थलों की सूची रखी थी। पीड़ित पक्ष के वकील एमटीएम हकीम ने बताया कि कोर्ट ने ये कहा कि पीड़ित लोग जिला अदालत में याचिका दाखिल करें और 6 महीने की सुनवाई के बाद निचली अदालत मामले पर निर्णय लेगी और हाईकोर्ट को भेजेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोर्ट में कहा था कि राज्य में धर्म के आधार पर मुआवजा देने की कोई व्यवस्था नहीं है।

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