लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आज चुनाव का पहला दौर खत्म हो गया। हालांकि सुबह बारिश की वजह से लोग मतदान केंद्रों से नदारद रहे। लेकिन शाम होते होते पोलिंग बुथों पर लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। लोगों ने उत्साहित होकर वोटिंग किए। उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में 62 फीसदी मतदान हुआ है। गौरतलब है कि यहां पिछले चुनाव में कुल 47 फीसदी ही वोटिंग हुई थी।
पहले चरण का मतदान यूपी के दस जिलों के 55 विधानसभा सीटों पर हुआ, जिसमें 862 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। इसमें दो मंत्रियों के अलावा 31 विधायकों और 15 पूर्व मंत्रियों की किस्मत बुधवार को ईवीएम मशीन में बंद हो गई।

हालांकि मतदान के दौरान हिंसा की कोई बड़ी खबर तो नहीं आई। लेकिन मिश्रिक और महोली विधानसभा क्षेत्रों में कई जगह मतदान का लोगों ने बहिष्कार किया। जानकारी के मुताबिक 25 गांवों के लोग मतदान करने ही नहीं पहुंचे। इलाके में विकास न होने से लोग नाराज थे। यही नहीं बाराबंकी में पोलिंग बूथ के अंदर बिजली न होने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यूपी में पहले चरण का मतदान चुनाव आयोग के लिए भी एक बड़ी चुनौती के समान था।
दरअसल, इस चरण के चुनाव में 38 फीसदी उम्मीदवार आपराधिक छवि के हैं। इसमें समाजवादी पार्टी ने 28, बीएसपी ने 24, बीजेपी ने 24, कांग्रेस ने 15, पीस पार्टी ने 12, जेडीयू ने 5 और आरएलडी ने एक दागी उम्मीदवार मैदान में उतारा है।
पहले चरण के मतदान में जिन दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर हैं, उनमें बीएसपी मंत्री रामहेत भारती और संग्राम सिंह, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, कांग्रेस सांसद जगदंबिका पाल के बेटे अभिषेक पाल, इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा, कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री अम्मार रिजवी सहित अयोध्या से लगातार जीतते आए बीजेपी प्रत्याशी लल्लू सिंह भी शामिल हैं।
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