ब्रिस्बेन। श्रीलंका के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज के आठवें मैच के कार्यवाहक कप्तान वीरेंद्र सहवाग ने जहां स्वीकारा है कि उन्होंने टीम को अनावश्यक आलोचना से बचाने के लिए लाहिरू तिरिमाने को आउट करने की अपील वापस ली वहीं, श्रीलंकाई कप्तान माहेला जयवर्द्धने ने भारतीय ऑफस्पिनर रविचंद्रन अश्विन द्वारा लाहिरु तिरिमाने को आउट करने की अपील करने को ही खेल भावना के विपरीत माना है। लेकिन जयवर्द्धने ने कहा कि अंततः खेल भावना की ही जीत हुई।
नियमित कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर एक मैच का प्रतिबंध लगने के कारण उनकी गैरमौजूदगी में श्रीलंका के खिलाफ मैच में टीम की कप्तानी संभालने वाले सहवाग ने कहा कि अंपायर ने मुझे बुलाकर अपील पर पुनर्विचार करने को कहा। यदि हम अपील वापस नहीं लेते तो लोग हमारी आलोचना करते कि यह खेल भावना के विपरीत है।

जयवर्द्धने ने कहा कि अश्विन द्वारा तिरिमाने को रनआउट की अपील करने से पहले उन्हें चेतावनी दिए जाने के बारे में पता नहीं था। उन्होंने कहा कि तिरिमाने को आधिकारिक रूप से चेतावनी दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि भारत को अपील ही नहीं करनी चाहिए थी।
सहवाग ने कहा कि ऑफस्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने तिरिमाने को आउट करने की अपील करने से पहले उन्हें चेतावनी दी थी। अपील किए जाने के बाद हर कोई इसी बारे में बात कर रहा था लेकिन जब अंपायर ने मुझे बुलाया तो मैंने कहा कि हम तिरिमाने को एक और चेतावनी दे सकते हैं लेकिन यदि उन्होंने फिर से ऐसा किया तो हम अपील करेंगे क्योंकि यह आईसीसी का नियम है।
श्रीलंकाई कप्तान ने कहा कि तकनीकी रूप से यदि कोई बल्लेबाज गलत तरीके से खेल रहा है तो उसे रनआउट न करना ही सही है। ईमानदारी से कहूं तो यदि मैं टीम इंडिया की जगह होता तो अपील ही नहीं करता। उन्होंने कहा, खेल को साफ सुथरा रखने की कोशिश करनी चाहिए और यदि कोई बल्लेबाज गलती कर रहा हो तो पहले अंपायर को सूचित करना चाहिए और उस पर नजर रखनी चाहिए। यदि वह फिर भी लगातार गलती करता रहे तो उसे रनआउट करना सही है।
(IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!)
More on: virender sehwag, india cricket, lahiru titimane, sri lanka cricket, out apeel, r ashwin








कमेंट्स
0