जम्मू/श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की तस्वीर साफ हो चुकी है। यहां की जनता ने एक बार फिर किसी की पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं दिया है। नैशनल कॉन्फ्रेंस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। जबकि पीडीपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी की रूप में सामने आई है। सरकार बनाने को लेकर जोड़-तोड़ की गणित शुरू हो गई है। कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन के संकेत मिल रहे हैं। राज्य में कुल 87 विधानसभा सीटें हैं जिनमें से 46 कश्मीर की, 37 जम्मू की और 3 सीटें लेह की हैं।
87 सीटों वाली विधानसभा में नैशनल कॉन्फ्रेंस 28 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। जबकि पीडीपी कुल 21 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस के खाते में 17 सीटें गईं हैं। वहीं उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए बीजेपी ने 11 सीटों पर जीत हासिल की है। बीजेपी ने ये सभी सीटें जम्मू में जीती हैं। निर्दलीय और अन्य के खाते में 9 सीटें गईं हैं। माना जा रहा है कि अमरनाथ मुद्दा पीडीपी और बीजेपी के लिए वरदान साबित हुआ। इस मुद्दे पर कट्टरवादी नजरिया रखने वाली दोनों पार्टियों को जबर्दस्त फायदा हुआ।
इस चुनाव में जिन दिग्गज उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई है उनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला (गांदरबल), उनके पिता फारुख अब्दुल्ला (हजरतबल और सनवार), पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती (वाची), उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद (अनंतनाग) से और कांग्रेस से गुलाम नबी आजाद (भद्रवाह) शामिल हैं।
इस बार भी जम्मू-कश्मीर में साफ बहुमत किसी को नहीं मिला है। पुराने अनुभव को देखते हुए कांग्रेस इस बार पीडीपी के साथ जाने को तैयार नहीं दिखती। चुनावों के बाद एनसी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। लेकिन वो अपने पुराने पार्टनर बीजेपी के साथ हाथ मिलाने को तैयार नहीं है। नेशनल कॉन्फ्रेंस इशारों में कांग्रेस की तरफ हाथ बढ़ाती दिख रही है। माहौल को भांपते हुए कांग्रेस को भी नेशनल कॉन्फ्रेंस में अच्छाइयां नजर आने लगी हैं।
वहीं पीडीपी नेताओं का कहना है कि हम गठबंधन की कोशिश करेंगे। अगर किसी के साथ गठबंधन नहीं हो पाई तो विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे।
जम्मू क्षेत्र में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के साथ गठबंधन की किसी भी संभावना से इंकार किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता चमनलाल गुप्ता ने कहा कि अमरनाथ जमीन विवाद के समय रहे पीडीपी के रुख और उसके अलगाववादी एजेंडा की वजह से उसके साथ गठबंधन का सवाल ही नहीं है। बीते चुनाव में एक सीट पर सिमट चुकी बीजेपी इस बार न केवल दोहरे अंकों में पहुंच चुकी है। बल्कि जम्मू इलाके में अपना परचम लहरा दिया है। माना जा रहा है कि अमरनाथ विवाद ने बीजेपी के लिए टॉनिक का काम किया।
राज्य में 17 नवंबर से 24 दिसम्बर के बीच सात चरणों में मतदान हुआ था। मतदान के दौरान राज्य के लगभग 63 फीसदी मतदाताओं ने अलगाववादियों द्वारा चुनावों का बहिष्कार करने की अपील को ठुकराते हुए अपने मताधिकार का उपयोग किया था। अलगाववादी नेताओं को भी इसका बखूबी अहसास है।
वर्ष 2002 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस 28 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। उस चुनाव में कांग्रेस को 20 पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को 16 और निर्दलीयों को 15 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इसके अतिरिक्त पैंथर्स पार्टी को चार और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को दो जबकि भारतीय जनता को महज एक सीट पर जीत हासिल हुई थी।
एक नजर जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव 2002 के नतीजों पर
पार्टी सीटें (87)
कांग्रेस 20
बीजेपी 01
पीडीपी 16
नेशनल कांफ्रेंस 28
पैंथर्स पार्टी 04
अन्य 18
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