नई दिल्ली। घाटी में चल रही लगातार राजनीतिक जद्दोजहद के बाद आखिरकार नेशनल कॉ्फ्रेंस और कांग्रेस ने साझा सरकार बनाने का फैसला कर लिया। इस सिलसिले में मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री निवास पर नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच बैठक हुई।
बैठक में नेशनल कांफ्रेस को समर्थन और सरकार की रणनीति पर चर्चा हुई। इसके बाद एनसी नेता उमर अब्दुल्ला सोनिया से मिलने 10 जनपथ पहुंचे। इनके साथ जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद और केंद्रीय मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज भी थे।
सोनिया से मुलाकात के बाद कांग्रेसी नेता पृथ्वी राज चौहान ने कहा कि उमर अब्दुल्लाह और दूसरे कांग्रेसी नेताओं की सोनिया जी से मुलाकात हुई। जिसमें कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की मिलीजुली सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा गया। जिसे सोनिया जी ने मंजूर कर लिया।
उधर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्लाह ने भी मुलाकात के बाद कहा कि मैंने सोनिया जी के सामने साझा सरकार का प्रस्ताव रखा। जिसे उन्होंने मंजूर कर लिया। मैं सोनिया गांधी का शुक्रगुजार हूं।
इसी बीच पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वो अभी भी यूपीए सरकार का हिस्सा हैं। उन्होंने ये भी कहा कि उनकी पार्टी घाटी में विपक्ष की सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है।
मालूम हो कि इससे पहले देर शाम राजधानी दिल्ली पहुंचे कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि उनकी पार्टी की चुनावों में सीटें भले कम हो गई हो लेकिन सरकार बनाने के बदले में कांग्रेस अपने हितों का पहले ध्यान रखेगी।
दरअसल कांग्रेस को 87 सदस्यों की विधानसभा में 17 सीटें मिली हैं जो पिछली बार से 3 कम है। लेकिन नेशनल कांफ्रेस की 28 सीटों का समर्थन मिलने पर 44 के जादुई आकड़े को पार किया जा सकता है।
सत्ता में वापसी का सपना देख रही नेशनल कांफ्रेस पहले ही साफ कर चुकी थी वो उमर अब्दुल्ला को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहती है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी मंगलवार सुबह से ही अपने आला नेताओं के साथ विचार विमर्श शुरू कर दिया था ताकि यूपीए की ही तरह जम्मू-कश्मीर की नई सरकार के लिए भी एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार किया जा सके।
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