नई दिल्ली। आज से 85 साल बाद ये दुनिया कैसी होगी ये कोई नहीं जानता। लेकिन एक बात तय है कि हमारी जिंदगी के बड़े हिस्से पर टैक्नोलॉजी राज करेगी। तब चमत्कार होंगे, पर उन्हें कोई साधु नहीं करेगा। वो चमत्कार खुद इंसान करेगा टैक्नोलॉजी की मदद से।
हो सकता है कि हममें से ज्यादातर तब इस दुनिया में न हों। लेकिन ये तय है कि 85 साल बाद सबके पास अपने-उपने एयरोप्लेन होंगे। हफ्ते में दो-तीन दिन की विदेश सैर मामूली बात होगी क्योंकि सुपरसोनिक हवाई जहाज आपकी खिदमत में होंगे।
दिल्ली से न्यू यॉर्क पहुंचनें में सिर्फ दो घंटे लगेंगे वो भी ढाई हजार लोगों के साथ। उस समय आपके हवाई जहाज को उड़ान भरने के लिए रनवे की जरूरत नहीं हेगी। हवाई जहाज उस समय एयरपोर्ट से, आपके घर की छत से या सड़क से सीधे ऊपर हवा में उठेगा और आपको ले जाएगा मंजिल की तरफ।
हवाई जहाज जल्द ही धरती से 30 से 40 किलोमीटर ऊपर आवाज की रफ्तार से कई गुना तेज उड़ रहा होगा। ये उड़ान महज कल्पना की नहीं है। ये भविष्य की आहट है। जो आपके दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है।
दुनिया भर में भविष्य का खाका बनाने वाले यानी फ्यूचरोलॉजिस्ट और फ्लाइट विशेषज्ञ इसी दिशा में काम कर रहे हैं। मगर ये होगा कैसे। वैज्ञानिक सोच रहे हैं हवाई यात्रा के सस्ते उपाय और वो तभी सस्ती होगी जब हवाई जहाज का ईंधन सस्ता हो जाए। इसलिए ऐसे ईंधन की तलाश जारी है जो आवाज या प्रदूषण न करे और फिर से इस्तेमाल किया जा सके।
फिनलैंड की सरकारी एयरलाइन कंपनी फिनएयर ने इसके लिए एक रास्ता सुझाया है। कंपनी ने अगले 85 साल का एक ब्ल्यूप्रिंट पेश किया है। इसका नाम है डिपार्चर 2093: फाइव विजंस ऑफ फ्यूचर फ्लाइंग। कंपनी अगले 85 साल में एयरपोर्ट्स और एयरक्राफ्ट दोनों को बदलना चाहती है।
फिनएयर के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट क्रिस्टर हैगलुंड के मुताबिक जल्द ही हवाई यात्रा उतनी ही आसान हो जाएगी जैसे कि कार में घूमना। हवाई जहाज सुपरसोनिक रफ्तार से चलेंगे और आज के मुकाबले 10 गुने ज्यादा यात्रियों को ले जा सकेंगे।
वैज्ञानिकों का कहना है कि जल्द ही उड़ान भरना लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन जाएगा। लोग इसके लिए निजी हवाई जहाज यानी पर्सनल मूवर इस्तेमाल करेंगे जो कार और एयरक्राफ्ट का मिलाजुला रूप होंगे।
सबसे बड़ी बात उड़ने के लिए बहुत अमीर होना जरूरी नहीं होगा कोई भी अपना ये ख्वाब पूरा कर सकेगा और वो भी बिना कुछ खास खर्च किए हुए।
85 साल बाद हवाई सफर को आसान और आरामदेह बनाने के लिए वैज्ञानिक अभी से काम कर रहे हैं तब हवाई यात्रा रोजमर्रा की बात होगी, वो प्रदूषण मुक्त होगी, देश की इनकम में वो बड़ा हिस्सा देगी और सबसे बड़ी बात तब हवाई सफर एक निजी बात होगी।
सवाल ये है कि हवाई यात्रा को कैसे प्रदूषण और शोर से निजात दिलाई जाए। इन खूबियों से लैस तेज गति के जहाजों का डिजायन कैसा हो। फिनलैंड की एयरलाइन कंपनी फिनएयर ने 85 साल बाद के ऐसे एयरक्राफ्ट्स का खाका पेश कर दिया है। उन्होंने 5 ऐसे मॉडल तैयार किए हैं जो हर तरह की सुविधाओं से लैस होंगे। साथ ही ये सभी जिन चीजों से बनेंगे, उन्हें फिर से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
ऐसा पहला हवाई जहाज होगा फिनएयर का मॉडल A600-850 M इसमें 600 से साढ़े 800 लोग बैठ सकेंगे। ये एयरक्राफ्ट सुपरसोनिक होगा यानी आवाज कि गति से तेज चलेगा और इससे जरा भी धुआं नहीं निकलेगा। इसमें मनोरंजन की पूरी सुविधा होगी।
खिड़कियां ऐसी होंगी, जिनसे आप धऱती या आसमान को चाहे तो करीब से देख सकेंगे। सीटें ऐसी होंगी जो यात्री के वजन, ऊंचाई और उम्र के मुताबिक बन जाएंगी। इंटरनेट और सेटेलाइट लिंक भी होगा।
दूसरी बात, हर सीट के पीछे की तरफ 20 इंच का थ्रीडी डिस्प्ले होगा। इस एयरक्राफ्ट में बिजली की जरूरत सोलर पैनलों से पूरी होगी, जो एयरक्राफ्ट पर मौजूद होंगे। दूसरा मॉ़डल होगा A600-850। जिसमें सबकुछ A600-850M की तरह ही होगा। बस, इसमें बिजली की जरूरत हवाई जहाज के बाहरी हिस्सों पर लगे सोलर पैनलों से पूरी होगी।
तीसरा मॉ़डल है फिनएयर A1700-2400 Cruiser जो असल में भविष्य के हवाई जहाज जैसा होगा। इसके इंजन इस तरह डिजायन किए गए हैं कि वो जमीन पर दौड़कर और सीधे ऊपर, दोनों तरह से उड़ान भर सकेगा। ये पानी पर भी उतर सकेगा। दूसरी सुविधाओं के अलावा इस हवाई जहाज में होलोग्राम थियेटर, रेस्टोरेंट और बार, दुकानें, मीटिंग रूम, ब्यूटी पार्लर, जिम्नेजियम और फर्स्ट एड स्टेशन भी होंगे।
फिनएयर ने स्पेसहोटल सर्विस शिप का डिजायन भी तैयार किया है। ये जहाज लोगों को सीधे स्पेस होटल ले जाएगा। फिनएयर एक छोटे एयरक्राफ्ट 2020 तक मार्केट में लाने की तैयारी कर रही है। ये एयरक्राफ्ट हेलीकॉप्टर और एक हवाई जहा का मिलाजुला रूप होगा। इस एयरक्राफ्ट की 85 फीसदी बाहरी सतह बिजली पैदा करने वाले सोलर पैनलों से बनी होगी।
85 साल बाद के एयरक्राफ्ट हल्के, ज़ंग से मुक्त और बेहद मजबूत होंगे। शुरू में वैज्ञानिक इन्हें कार्बन फाइबर रिइन्फोर्स्ड प्लास्टिक यानी CFRP से बनाने की सोच रहे हैं। जो अल्युमिनियम, टाइटेनियम या स्टील से ज्यादा टिकाऊ है। फिर इन्हें फाइबर मैटल से बनाया जाएगा।








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