IBN7 IBN7

[+] 12 और खबरें

क्यों मर रहे हैं दिल्ली के पेड़?

Posted on Dec 31, 2008 at 18:27 | Updated Dec 31, 2008 at 18:44

Email
Print
0

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पेड़ों का हाल बेहाल है। सिटीज़न जर्नलिस्ट देवाशीष भट्टाचार्य ने पाया कि एक भरा-पूरा नीम का पेड़ हल्की आंधी में ही गिर गया। सवाल उठा कि बहुत पुराना और बाहर से दिखने में स्वस्थ ये पेड़ अचानक कैसे गिर गया। पता चला कि पेड़ अंदर ही अंदर खोखला हो चुका था। वजह थी पेड़ के आस-पास बनाया गया सीमेंट का चबूतरा।

पेड़ों के आसपास कांकरीट की पक्की जमीन होने से बारिश का पानी रिस कर नीचे नहीं जा पाता और ऐसे में पेड़ सूख जाता है। सीमेंट और पेड़ के बीच जो थोड़ी सी जगह छोड़ी जाती है उसमें बारिश के दिनों में अक्सर पानी भर जाता है। ये पानी जब नीचे नहीं जाता तो अंदर ही अंदर पेड़ को गला देता है। ऐसे में पेड़ हल्की सी आंधी भी नहीं झेल पाते। पेड़ों के आसपास सीमेंट के इस तरह के चबूतरे पूरी दिल्ली में मौजूद हैं।

RTI के जरिए देवाशीष ने जाना कि दिल्ली में हो रहा ये कांक्रीटीकरण पेड़ों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। दिल्ली सरकार ने 1994 में इसके लिए Trees Act बनाया। इस Act के मुताबिक पेड़ों को काटना या उन्हें किसी भी किस्म का नुकसान पहुंचाना कानूनन जुर्म है। लेकिन इसके बाद भी पेड़ बदहाल हैं। लुटियंस जोन सहित राजधानी के कई VVIP इलाकों में पेड़ों की हालत इतनी ही खस्ता है। 2007 में दिल्ली के तिलक नगर इलाके में बिना किसी कारण के पेड़ों के गिरने के मामले अचानक बढ़ गए। NDMC ने इसकी वजह जानने के लिए देहरादून के Forest Research Institute से इसकी जांच करवाई।

FRI ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा कि जड़ें खोखली और कमजोर होने की वजह से ही पेड़ इस तरह गिर रहे हैं। FRI का मानना है कि इन पेड़ों को बचाने के लिए जरूरी है कि जल्द से जल्द उनके आसपास मौजूद कांकरीट और सीमेंट के फुटपाथ तोड़े जाएं।

नियम कहते हैं कि फुटपाथ और पेवमेंट बनाते समय पेड़ के आसपास 6 बाई 6 फुट की जगह छोड़ी जानी चाहिए लेकिन खुद सरकारी विभाग इन नियमों की परवाह नहीं करते। नतीजा पिछले तीन सालों में आंधी तूफ़ान के दौरान 271 पेड़ गिर चुके हैं। इसके बावजूद शहर की खूबसूरती के नाम पर NDMC का सिविल विभाग पेड़ों का गला घोंटने में जुटा है।




सुप्रीम कोर्ट के सामने भी पेवमेंट्स बनाने का काम चल रहा है। ये सही है कि फुटपाथ और पेवमेंट लोगों के चलने के लिए जरूरी हैं मगर सीमेंट के पेवमेंट पेड़ों की बर्बादी का कारण बन रहे हैं। पेवमेंट बनाने के लिए हमारे पास दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं। लाल बजरी देखने में सुंदर है और रखरखाव में सस्ती। ये पेड़ों के लिए अच्छी साबित होती है क्योंकि बारिश का पानी सीधे धरती में जाता है।

दिल्ली के कुछ ऐसे इलाके हैं जहां कांक्रीट और सीमेंट की बजाय घास और लाल बजरी से पेवमेंट बनाए गए हैं। हाल ही में आई सीपीसीबी की एक रिपोर्ट ने ये खुलासा किया कि दिल्ली में प्रदूषण का असर अब यहां के बच्चों पर दिखने लगा है। प्रदूषण की वजह से दिल्ली के स्कूली बच्चों के फेफड़े 43 फीसदी तक कमज़ोर हो चुके हैं।

ऐसे में ये बात और भी जरूरी हो जाती है कि जो पेड़ मौजूद हैं उनके रखरखाव पर सरकार ध्यान दे। NDMC के अधिकार क्षेत्र में आने वाले किसी भी इलाके में निर्माण से पहले सिविल विभाग को पेड़ों के लिए Horticulture विभाग से अनुमति लेनी होती है। RTI के ज़रिये देवाशीष ने जाना की Horticulture विभाग से ऐसी कोई अनुमति नहीं ली जा रही है।

NDMC के अधिकारियों से बात की लेकिन सरकारी अधिकारियों से कुछ जानना आसान नहीं। सिविल विभाग के अधिकारी ने कैमरे पर बात करने से इनकार कर दिया। Horticulture विभाग के निदेशक ने कहा कि इसके लिए उन्हें Chairman से अनुमति लेनी होगी और Chairman ने कहा कि उनके पास बातचीत के लिए समय नहीं है।


IBNKhabarMore on: Citizan journalist, Delhi



पिछली खबर
पक्षियों के बसेरे को बचाना चाहते हैं गुलदेव
अगली खबर
सही राशन के लिए रंग लाई प्रवीण भाई की लड़ाई

IBN7IBN7
IBNLiveIBNLive
IBNLive IBNLive

कमेंट्स

0

  
अपना कमेंट भेजें

नाम *

 

सिटी *

ईमेल *

     

कमेंट्स *


IBN7IBN7
IBN7

सिटिज़न जर्नलिस्ट में ये भी

दिल्ली वालों को राह दिखा रहा है ’लेटस् डू इट डेहली’

इसमें कोई शक नहीं कि साफ-सफाई के इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के हिसाब से दिल्ली बहुत पीछे है। 19:38 PM, Aug 30, 2010

लोगों को डेंगू से बचाने में जुटे हैं शोएब

दक्षिणी-पूर्वी दिल्ली हमेशा ही डेंगू की चपेट में रहती है। जामिया नगर का हाल तो बेहद खराब है। 19:36 PM, Aug 30, 2010

नालों पर सड़कें बनेंगी तो गड्ढे तो होंगे ही!

दिल्ली को इंटरनेशनल सिटी बनाना तो दूर, सरकार कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी ही पूरी नहीं कर पाई है। 19:35 PM, Aug 30, 2010

बरसात में ‘बारिश विहार’ बन जाता है बसंत विहार

रंजीत खोसला दिल्ली के बसंत विहार में रहते हैं। उन्होंने बताया कि थोड़ी सी बारिश के बाद ही ये पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। 15:54 PM, Aug 30, 2010

मासूम रश्मि की तस्वीरें बिखेर रही हैं रोशनी

देश में रोजाना तकरीबन 7 हजार कन्या भ्रूण हत्याएं होती हैं। 19:04 PM, Aug 25, 2010

कल तक सन्नाटा था, आज वहां किलकारियां हैं

देश में एक साल में लगभग डेढ़ करोड़ लड़कियों की भ्रूण हत्याएं की जाती हैं। 19:01 PM, Aug 25, 2010

तारा के जज्बे से हारी भीलवाड़ा की रूढ़ीवादी सोच

डॉक्टरों के खिलाफ आवाज़ उठाई हैं सिटिजन जर्नलिस्ट तारा आहलुवालिया ने। 18:57 PM, Aug 25, 2010

बेटियों को बचाने के लिए पति से भिड़ गई वो!

कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ बना कानून आज भी सिर्फ वक्तव्यों और भाषणों में ही सुनाई देता है। 18:36 PM, Aug 25, 2010

आरटीआई ने दिलाया बाढ़ से उजड़ा आशियाना

बिहार में मधुबनी के मजलूम नदफ के रूप में खुद के हक की लड़ाई का बड़ा उदाहरण देखने को मिला। 18:12 PM, Aug 18, 2010

सरकारी हैंडपंप की मांगी जानकारी, मिली जेल

दूसरों के हक़ के लिए लड़ने वाले शिव कुमार को 29 दिनों तक जेल में भी बंद किया गया लेकिन आखिरकार जीत सच्चाई की ही हुई। 18:07 PM, Aug 18, 2010
IBN7
IBN7IBN7
IBN7IBN7