नई दिल्ली। सामने देखते रहो...कमांडो आगे बढ़ रहे हैं...उन पर ग्रेनेड फेंको...अपनी जगह बदलते रहो। ...कवर फायर करो...गोलियों की बौछार करो...हर तरफ ताबड़तोड़ गोलियां चलाओ। ये बातचीत पाकिस्तान के खिलाफ एक और बड़ा सबूत है। मुंबई हमले के दौरान पाकिस्तान में बैठे तीन शख्स आतंकियों को हुक्म दे रहे थे। लगातार हौसला बढ़ा रहे थे। खजूर ले गए हो...लगातार खजूर खाते रहो...किसी कीमत पर थकना नहीं है...नींद आए तो बारी-बारी से सोते रहना। आतंकियों से ये बोलने वालों की अब पहचान हो गई है और उनकी आवाज खुद बन गई है पाकिस्तान के खिलाफ एक और सबूत। मुंबई में कत्लेआम मचा रहे दसों आतंकवादियों के साथ लश्कर के तीन कमांडर बातचीत कर रहे थे। वो हर पल आतंकवादियों को और ज्यादा तबाही मचाने का निर्देश दे रहे थे। मुंबई के होटल ताज, ओबरॉय होटल और नरीमन हाउस पर कब्जा जमाने वाले आतंकवादियों की पाकिस्तान में बैठे तीनों आकाओं से ये बातचीत भारतीय जांच एजेंसियों ने रिकॉर्ड की है।
आईबीएन 7 आपको पहले ही बता चुका है कि मुंबई हमले के दौरान आतंकियों के आका उन्हें पंजाबी हिंदी में निर्देश दे रहे थे। 26 नवंबर को मुंबई हमले के कुछ घंटे बाद ही खुफिया एजेंसियों ने उन मोबाइल नंबरों को टेप करना शुरू कर दिया जिनके जरिए ये आतंकी पाकिस्तान बात कर रहे थे। आतंकियों और उनके आकाओं में ये बातचीत दो से तीन मिनट तक ही होती थी। आईबीएन 7 के पास आतंकियों और लश्कर आकाओं की बातचीत का ब्योरा मौजूद है। 26 नवंबर की रात जब अजमल कसाब और उसका साथी इस्माइल सीएसटी स्टेशन पर पहुंचे तो उनके मोबाइल पर पाकिस्तान से एक फोन आया। नंबर जाना-पहचाना था। दूसरी तरफ से आवाज आई।
अजमल...इस्माइल..तुम लोग सीएसटी और कामा हॉस्पिटल में अंधाधुंध फायरिंग करना...ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारो..हर तरफ फायरिंग करो।
ये आवाज सुनने के बाद इस्माइल और अजमल कसाब ने सीएसटी स्टेशन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इसी बीच इस्माइल का फोन फिर बजा। दूसरी तरफ से आवाज आई-अजमल कसाब...अंधाधुंध फायरिंग जारी रखो...तुम्हारे साथियों को ताज और ओबेरॉय होटल पर कब्जा करना है...पुलिस को सीएसटी पर ही उलझाए रखो...फायरिंग करते रहो। बातचीत से साफ हो जाता है कि पाकिस्तान में बैठे लश्कर कमांडर अजमल कसाब और उसके साथियों से क्या चाहते थे। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई की मदद से भारतीय खुफिया एजेंसियों ने उन आवाजों की भी पहचान कर ली है। जानकारी के मुताबिक मुंबई हमले के दौरान अजमल और उसके साथी पाकिस्तान में लश्कर के तीन आकाओं के संपर्क में थे। इनके नाम हैं-जरार शाह, अबु हम्जा और अबु काफा। जरार शाह वही कमांडर है जिसने अमेरिका के वॉल स्ट्रीट जर्नल के सामने कबूल किया था कि मुंबई हमले के पीछे लश्कर का हाथ है। आईबीएन 7 आपको पहले ही बता चुका है कि मुंबई हमले के लिए आए सभी दसों आतंकियों को खुद अबु काफा ने चुना था। जब ये लोग कराची से निकले तो खुद अबु हम्जा उन्हें छोड़ने आया था।
लश्कर के आकाओं ने वॉयर ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल के जरिए आतंकियों से बात करके एजेंसियों को बरगलाने की पूरी कोशिश की थी। लेकिन आवाज की पहचान हो जाने के बाद पाकिस्तान का झूठ पूरी दुनिया के सामने आ गया है। मुंबई पर हमला करने आए आतंकियों के पास सैटेलाइट फोन भी थे लेकिन वो होटल में लोगों से छीने हुए मोबाइल से ही पाकिस्तान बात कर रहे थे। जैसे ही सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों की इस चालाकी का पता चला विदेशी टूरिस्टों के उन मोबाइलों को भी टेप किया जाने लगा जो आतंकियों के कब्जे में थे। सीएसटी स्टेशन पर कसाब और इस्माइल से बात करने के बाद लश्कर कमांडर जरार शाह, अबु हम्जा और अबु काफा का पूरा ध्यान ओबेरॉय और ताज होटल पर टिक गया। ये वो वक्त था जब आतंकी होटलों में कब्जा कर चुके थे।
तीनों कमांडर आतंकियों की हर हरकत पर नजर रख रहे थे। फोन रिकॉर्डिंग इसका जीता-जागता सबूत है-सामने देखते रहो...कमांडो आगे बढ़ रहे हैं...उन पर ग्रेनेड फेंको...अपनी जगह बदलते रहो। कवर फायर करो...गोलियों की बौछार करो...हर तरफ ताबड़तोड़ गोलियां चलाओ। पाकिस्तान में बैठे आकाओं के हर हुक्म की तामील हो रही थी। लेकिन जब होटल में छिपे आतंकी हर तरफ से घिर गए और लगातार लड़ते रहने की वजह से उनका हौसला कम पड़ने लगा तो जरार शाह, अबु हम्जा और अबु काफा ने उन्हें फिर फोन करके हिम्मत बंधाई। आग लगाओ...आग लगाओ...जब लोग बाहर भागने लगें तो तुम लोग भी उनके साथ बचकर बाहर निकल जाना।
खजूर ले गए हो...लगातार खजूर खाते रहो...किसी कीमत पर थकना नहीं है...नींद आए तो बारी-बारी से सोते रहना। तीनों कमांडरों की आवाज में बेहद गंभीरता झलक रही थी। किसी कीमत पर थकना नहीं है जैसी बातें करके वो अपने लड़कों को लड़ाई ज्यादा से ज्यादा वक्त तक खींचने के लिए समझा रहे थे। कमांडो किस जगह तैनात हैं इसकी भी जानकारी दी जा रही थी। बड़ी बात ये कि ताज होटल में आग लगाने का आदेश भी पाकिस्तान में बैठे लश्कर कमांडरों ने ही दिया। दरअसल एफबीआई के पास इन तीन लश्कर कमांडरों की आवाज का डाटा पहले से मौजूद था। मुंबई हमले के बाद जब तीन लश्कर कमांडरों की आवाज उन लोगों से मिलाई गई जो कसाब और उसके साथियों से बात कर रहे थे तो सारा सच सामने आ गया।
पाकिस्तान में बैठे लश्कर कमांडरों का इरादा मुंबई हमले के जरिए पूरी दुनिया को हिला देने का था। फोन रिकॉर्ड से साफ है कि नरीमन हाउस में लोगों की हत्या करने के लिए भी लश्कर कमांडरों ने ही निर्देश दिया था। नरीमन हाउस में इमरान बाबर नाम का आतंकवादी अपने साथियों के साथ घुसा और उसने हेल्ट्सबर्ग नाम की इजरायली महिला का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया था। इसी मोबाइल पर पाकिस्तान से लश्कर कमांडरों ने फोन करके निर्देश दिए। लोगों को बंधक बनाओ...इजरायली लोगों को मारो। फौज आ रही है...होशियार रहो...देखते रहो...कवर लो।
रिकॉर्ड से साफ है कि नरीमन हाउस में इजरायली लोगों को मारने का आदेश भी लश्कर कमांडरों ने ही दिया था। वो चाहते थे कि मुंबई हमले का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो। लेकिन जब 28 नवंबर की शाम जब एनएसजी के कमांडो आतंकवादियों पर हावी होने लगे तो लश्कर कमांडरों ने आखिरी बार फोन किया। -उन रास्तों पर लगातार निगाह रखना जहां से कमांडो भीतर दाखिल हो सकते हैं। आखिरी वक्त आ गया है...नमाज अदा करो...तुम कुछ आखिरी पैगाम देना चाहोगे।
लश्कर कमांडरों का फिदायीन दस्ता अपना काम पूरा कर चुका था। जरार शाह और अबु हम्जा अब इमरान बाबर और उसके साथियों से आखिरी पैगाम ले रहे थे लेकिन वो ये भूल गए कि वीओआईपी के इस्तेमाल के बावजूद उनकी आवाज पकड़ी जा सकती है।
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