जबलपुर। ये एक बहुत ही दर्दनाक कहानी है। इस कहानी में एक अंधी मां है। एक ऐसी मां जिसे जिंदगी ने हर कदम पर छला है।
जिंदगी ने हर कदम पर छला है लेकिन भगवान से विश्वास नहीं उठता है। इस मां के साथ क्या क्या होता है जानकर आपकी आंखें छलक जाएंगी।
पिछले बारह सालों से इस मां को एक कांवड़ में बिठाकर सारे धामों और तीर्थों की यात्रा करा रहे हैं। जरा सोचिए आज के युग में जवान होते ही बच्चे अपने माता पिता को भूल जाते हैं उस युग में ये बेटा बारह साल से मां की आखिरी ख्वाहिश को पूरा करने में लगा है। डर सिर्फ इतना है कि कहीं आखिरी तमन्ना के पूरा होने से पहले ही इस मां का निधन न हो जाए।
दिनभर कंधे पर कांवड़ और रात में मां की ऐसी सेवा। एक डायरी है जिसमें लिखा है इस अंधी मां की दास्तान। इसमें लिखा है कब इस परिवार के साथ क्या हुआ। इसमें लिखा है कैसे अंधी हुई ये मां। इसमें लिखा है कैसे ये बेटा अपनी मां को तीर्थ कराने के लिए निकला। क्या हुआ था बारह साल पहले इस परिवार के साथ।
कलियुग के इस श्रवण कुमार की कहानी सुनकर आप भी रो पड़ेंगे। लेकिन एक अहसास तो है कि अभी भी इस देश में ऐसे नौजवान हैं जो ये मानते हैं कि मां-बाप की सेवा ही बच्चों का परम धर्म है।
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