सूरत। सूरत में इन दिनों मौत का मातम पसरा है। घर-घर से मौत की चीख निकल रही है। हीरा फैक्टरी में काम करने वाले 22 साल के हीरा कारोबारी भावेश ने मंदी की वजह से खुदकुशी कर ली। भावेश बीते तीन महीने से बेरोजगार था। हीरा फैक्टरी के बंद हो जाने के बाद उसके पास कोई काम नहीं था। हीरा फैक्टरी बंद होने की वजह से सूरत में खुदकुशी करने वाला भावेश 16 वां था। जिसके बाद 2 और कारीगरों ने खुदकुशी कर ली। डायमंड उद्योग में मंदी की वजह से लगभग 18 लोग मौत को गले लगा चुके हैं।
दरअसल सूरत के डायमंड उद्योग पर वैश्विक मंदी का असर साफ-साफ देखा जा सकता है। सूरत में करीबन 10 लाख लोग हीरा उद्योग से जुड़े हैं। इनमें से कई लाख लोग पिछले 3 महीने से बेरोजगार हैं। बेकारी से परेशान करीब 18 हीरा कारीगरों ने अब तक खुदकुशी कर ली है।
गुजरात की 5 करोड़ जनता की बात करने वाले नरेन्द्र मोदी ने भी डायमंड उद्योग को बचाने से किनारा कर लिया है। सूरत में खुदकुशी की तरह लोगों के बढ़ते रुझान से सामाजिक कार्यकर्ता और विशेषज्ञ सकते में हैं। हीरा कारीगरों की परेशानी शहर की परेशानी बन गई है। लेकिन गुजरात के गर्व की बात करने वाली गुजरात सरकार और उसके मुखिया को इनकी कोई फिक्र नहीं है।
मंदी की मार ने स्कूली बच्चों को 50 साल पहले के दौर में पहुंचा दिया है। सूरत के हीरा कारोबार से जुड़े कारीगरों के बच्चे अब ऊंट गाड़ी में स्कूल जा रहे हैं। ये दिन भी देखना पड़ेगा किसी ने सोचा नहीं था। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए ऑटो का किराया नहीं दे पा रहे हैं।
सूरत में हीरा कारोबार से जुड़े परिवारों की इस दुर्दशा पर गुजरात सरकार भले ही आंखें मूंद ली हो। लेकिन कई एनजीओ मदद के लिए सामने आ रहे हैं। बापा सीताराम चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से डायमंड वर्करों को बाज़ार से आधी कीमत में गेहूं दिया जा रहा है। वहीं सूरत की प्राइवेट ट्रैवल्स यूनियन ने भी हीरा कारीगरों को बस में सफर करने पर रियायत दी है। कारीगरों को सामान के साथ सफर करने पर आधा किराया देना होगा साथ ही उनसे बच्चों का किराया भी नहीं लिया जाएगा। सूरत के वराछा इलाके के प्राइवेट नर्सिंग होम ने भी हीरा कारीगरों के इलाज के लिए फीस में 30 से 50 फीसदी तक कटौती कर दी है।
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