आजमगढ़। उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। आतंकियों से मोर्चा लेने के लिए मुहैया हथियार और सुरक्षा उपकरण बेहद घटिया क्वालिटी के हैं।
दरअसल यूपी पुलिसवालों को जो बुलेटप्रूफ जैकेट दी गईं है, वो एक फायर तक नहीं सह पाती। नजदीक से चलाई गई गोली भी उन जैकेट के आरपार निकल जाती है। आजमगढ़ के डीआईजी के सामने हुए परीक्षण में पुलिसवालों को मिलीं बुलेटप्रूफ जैकेट की असलियत सामने आ गई।
दरअसल सिपाहियों और अफसरों को मुहैय्या कराए गए हथियारों और सुरक्षा उपकरणों की क्वालिटी परखने का फैसला किया गया और इस काम के लिए आजमगढ़ रेंज के डीआईजी विजय कुमार आगे आए। सबसे पहले बुलेट प्रूफ जैकेट को परखने का फैसला हुआ।
करीब 30 मीटर दूरी पर एक बुलेट प्रूफ जैकेट रख दी गई। डीआईजी ने AK47 राइफल संभाली और निशाना साधा। फायर होते ही वहां मौजूद पुलिसवाले बुलेट प्रूफ जैकेट की तरफ दौड़ पड़े। राइफल की एक गोली 30 मीटर दूर रखी बुलेट प्रूफ जैकेट के पार निकल चुकी थी। गोली ने जैकेट में लगे बुलेट प्रूफ टाइल को चीर डाला था।
महज एक गोली से बुलेट प्रूफ जैकेट का ऐसा हाल देखकर डीआईजी भी चकरा गए। सिपाहियों के सामने ही सुरक्षा के नाम पर उन्हें थमाई गईं बुलेट प्रूफ जैकेटों की कलई खुल चुकी थी।
पुलिसवाले ये सोचकर पसीना-पसीना हो रहे थे कि क्या ऐसी बुलेट प्रूफ जैकेट आतंकियों की गोलियों की बौछार से उनका बचाव कर सकेंगी। सिपाहियों को परेशान देखकर डीआईजी भी फिक्रमंद हो उठे।
हालांकि उन्होंने अपनी चिंता छुपाने की कोशिश की। लेकिन सच्चाई उनकी जुबान पर भी आ ही गई। हालात को भांपते हुए डीआईजी ने फौरन रिपोर्ट तैयार करने को कहा और रिपोर्ट को सभी आला अफसरों को भिजवाने का आदेश दे दिया।
बुलेट प्रूफ जैकेटों की असलियत उजागर होने के बाद डीआईजी ने दूसरे हथियारों और उपकरणों को जांचने-परखने की जहमत नहीं उठाई। जाहिर है कहीं उनके सामने ही बाकी हथियारों में भी कोई खामी निकल आती तो पुलिस विभाग की और फजीहत होती।
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