वाराणसी। जीवन दायिनी मां गंगा की पूजा हम सभी करते हैं। अपने पापों को धोने के लिए पवित्र पावनी गंगा में गोता भी लगाते हैं। लेकिन कभी हम इसकी ओर मुड़कर देखते भी हैं कि क्या हाल बनाकर रख दिया है हमने मां गंगा का। अगर हालत ऐसे ही रहे, तो मां गंगा कहीं खुद को अपने में ही समेट ना ले। सिटीज़न जर्नलिस्ट इस एपिसोड में हम बात करेंगे उन सपूतों की जो मां गंगा को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ज़हरीली होती जा रही गंगा को बचाने के लिये सरकारी तौर पर कोरोड़ों रुपए ख़र्च किये जा रहे हैं लेकिन हालात और ख़राब होते जा रहे हैं फिर भी कुछ लोग हैं जो अपने दम पर गंगा को बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। वाराणसी के कुछ आम लोगों ने इसकी सफ़ाई के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है।

दरअसल गंगा की इस हालत पर अफसोस हम सब जताते हैं, लेकिन क्या हमने इस प्रदूषण को रोकने की कोई कोशिश की। गंगा में जो गंदगी है वो हम जैसे लोग ही फैलाते हैं। जाहिर है इसे साफ रखने की जिम्मदारी प्रशासन के साथ-साथ हमारी भी है। यही नहीं, गंगा की लगातार बिगड़ते हालात को देखकर अब साफ हो चुका है कि प्रशासन से सफ़ाई की उम्मीद करना बेकार है। इसलिए गंगा की सफ़ाई अब आम आदमी खुद करने लगे हैं।
सिटीज़न जर्नलिस्ट पूजा ने वाराणसी के अस्सी घाट की सफाई के लिए एक नयी तरकीब निकाली है। इसके लिए पूजा ने कई समाजिक संस्थाओं से मदद ली है। पूजा के मुताबिक सभी वॉलन्टियर शाम को 2 घंटे के लिए यहां घाट पर आते हैं और सभी के हाथ में सीटी होती है।
पूजा के इस प्रोग्राम के तहत अगर कोई कचरा गंगा में फेंकते नज़र आता है तो घाट पर खड़े वॉलन्टियर/कार्यकर्ता सीटी बजाकर उन्हें रोकते हैं और आगे ऐसा नहीं करने के लिए समझाते हैं। इसके अलावा जो कूड़ा पहले से ही घाट पर पड़ा है, उसे साफ़ करने का जिम्मा भी इन्होंने उठाया है। ये लोग सूती बैग कचरे को भरकर डंपिंग ग्राउंड में जाकर फेंकते हैं। पूजा को उम्मीद है कि उनकी ये छोटी से कोशिश जरूर रंग लाएगी। साथ ही पूजा का आम लोगों से अपील है कि अगर उनके आसपास गंगा या कोई भी नदी बहती हो, तो उसे साफ़ रखने की कोशिश करें।
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