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रिव्यू: बुरी फिल्म नहीं है विल स्मिथ की ‘मैन इन ब्लैक-3’

| May 26, 2012 at 01:09pm | Updated May 26, 2012 at 02:27pm

मुंबई। ‘मैन इन ब्लैक-3’ किसी भी तरह से बुरी फिल्म नहीं है पर ये काफी हद तक बेमकसद जरूर लगती है। हां इसमें थोड़े मजाक की कमी है जो इस सीरीज की सबसे बड़ी खूबी थी। विल स्मिथ और टॉनी ली जोन्स एजेंट्स ‘जे’ और ‘के’ के तौर पर वापस लौटते हैं। एक ऐसी जोड़ी जो ब्लैक सूट पहनती हैं और इनका काम है न्यूयॉर्क की गलियों में एलियंस को ढूंढना जो आदमी के भेष में छुपे हुए हैं।

एम्मा थॉम्पसन उनकी नई बॉस एजेंट ‘ओ’ के किरदार में है और जर्मेन क्लेमेंट उस एक हाथ वाले विलेन ‘बोरिस द एनिमल’ के किरदार में है जो चांद की सुरक्षित जेल से भाग जाता है और अपने अतीत को बदलना चाहता है। बोरिस 1969 में वापस जाकर एजेंट ‘के’ को मारना चाहता है स्मिथ के किरदार में एजेंट ‘जे’को अब अपने साथी को बचाने अतीत में वापस जाना पड़ेगा। विल स्मिथ कहीं कहीं आपको हसांएगे। फिल्म में एंडी वॉरहो का एक छोटा सा रोल काफी स्मार्ट लगता है। बाकी फिल्म में कुछ खास नहीं है।

जवानी के एजेंट ‘के’ के किरदार में जोन्स ब्रोलिन बकवास लगते हैं। इसमें स्मिथ और जोन्स के बीच वो केमिस्ट्री नजर नहीं आती जो उनकी पहली फिल्मों में नजर आई थी। मैन इन ब्लैक-3 में एक नया किरदार है जो भविष्य देख सकता है पर उसे ज्यादा नहीं दिखाया गया है।

फिल्म के अंत में कुछ भावनात्मक मोड़ हैं जो आपको हैरानी में डाल देंगे। आखिरकर मैन इन ब्लैक-3 हंसी मजाक की फिल्में रही हैं ना कि भावनात्मक। मैं मैन इन ब्लैक-3 को पांच में से दो स्टार देता हूं।

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