वाराणसी। दो साल पहले हमने आपको सिटिज़न जर्नलिस्ट शांति लाल की मुहिम से रूबरू कराया था, जो वाराणसी के घाटों को बचाने में बरसों से लगे हुए हैं। उस वक्त अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिलाया था, लेकिन दो साल गुज़र जाने के बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं आया है।
दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक वाराणसी, गंगा के तट पर आरती के बिना इस पवित्र नगरी के दर्शन अधूरे हैं। लेकिन अब इन घाटों पर खतरा बढ़ता जा रहा है। यहां हर साल बारिश के मौसम में पानी का बहाव बढ़ता है और उसके साथ आती है मिट्टी और रेत। पानी उतरने के बाद ये मिट्टी नदी के किनारे और घाट की सीढ़ियों पर जमा होती रही है। इसे जल्द साफ़ करना बेहद जरूरी होता है, क्यों एक बार जब ये जम जाती है, तो घाट का नक़्शा ही बदल देती है। लेकिन म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन को इस बात की कभी परवाह नहीं रहती।

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