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सूखे की वजह से बहू-बेटियां जिस्मफरोशी को मजबूर!

| May 29, 2012 at 07:21pm | Updated May 29, 2012 at 08:59pm

हैदराबाद। आंध्र प्रदेश का अनंतपुर जिला एक दशक से सूखे की चपेट में है। अनंतपुर में जमीने बंजर हो रही हैं और किसान-मजदूरों के सामने सिर्फ दो ही रास्ते बचे हैं मौत या जिस्मफरोशी। सरकार द्वारा सुध नहीं लेने के बाद जिले के किसानों ने अब अपने ही घरों की महिलाओं को बेचना शुरू कर दिया है। ये लड़कियां दिल्ली से मुंबई तक जिस्मफरोशों के बाजारों में पहुंच रही हैं। खरीद फरोख्त से मिले पैसे का इस्तेमाल किसान खेती बचाने में कर रहे हैं लेकिन सूखे की वजह से खेती भी नहीं हो पा रही है।

सूखे ने अनंतपुर की जमीनों की तरह किसानों के अंदर भावनाओं को भी सुखा दिया है, इसीलिए जब यहां घर के मुखिया भूख से बिलबिलाते बच्चों को देखते हैं, तो सबसे पहले अपनी जवान बेटियों-बहनों और पत्नियों का सौदा कर डालते हैं लेकिन ये सौदा भी उन्हें सामने खड़ी मौत से नहीं बचा सकता क्योंकि लड़कियां बेचने से मिली रकम भी उन्हें जिंदगी नहीं दे पा रही है। एक पीड़ित ने बताया कि खेती के लिए पैसे की जरूरत थी और इसके लिए उन्होंने अपनी बेटी को मुंबई भेज दिया। जो पैसा आया उसे खेत में लगाया लेकिन फसल खराब हो गई और वे कंगाल हो गए।

कदरी इलाके में रहने वाली किसान की मजबूर बेटी ने बताया कि पिताजी की दो एकड़ जमीन है पर फसल डालने के लिए बारिश नहीं है, बीज के लिए भी पैसा चाहिए। उसने बताया कि सूखे की वजह से उसके मां-बाप परेशानी में थे। कुछ महिलाओं ने उसके घर वालों को बोला कि उनकी मुश्किल दूर हो जाएगी और फिर वे उसे मुंबई के भिवंडी ले गए।

सूखे और पैसे की तंगी की वजह से इस इलाके की कई महिलाएं जिस्मफरोशी के धंधे में धकेली जा चुकी हैं। इस इलाके में एक 18 साल की लड़की ने छोटी सी उम्र में ही जिस्मफरोशी की घिनौनी दुनिया देख ली है और अब उसके मन में सरकार के लिए जबरदस्त गुस्सा भर गया है। ऐसे ही कुछ परिवारों की महिलायें दिल्ली के दलालों के हाथों से बड़ी मुश्किल से छूटकर वापस घर पहुंच पाई हैं लेकिन भूख और गरीबी ने यहां उनका जीना हराम कर दिया है। सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि इनमें से कुछ महिलाएं HIV की शिकार हो चुकी हैं।

अनंतपुर आंध्र प्रदेश के रायलसीमा इलाके के उन चार जिलों में है जहां पिछले दस साल से सूखा पड़ रहा है। जिले का पेनुकोंडा, कदरी और हिंदूपुरा ऐसे मंडल हैं, जो भयंकर सूखे की चपेट में हैं। सरकारी योजनाएं फाइलों की शोभा बढ़ा रही हैं, जिनका जमीन पर कोई वजूद नहीं दिखाई देता जबकि किसानों के हिमायती राज्य सरकार के मुखिया किरण कुमार रेड्डी इसी इलाके हैं फिर भी यहां के लोगों की सुनने वाला कोई नहीं।

चुनाव के मौसम में ही नेता इन इलाकों में पहुंचते हैं और चुनाव के बाद नेता उन्हें भुला देते हैं। सरकारी अनदेखी की वजह से ज्यादातर किसान कर्ज लेकर कंगाल हो चुके हैं और अब वो घर की महिलाएं बेचने के लिए मजबूर हैं।

पिछले साल अनंतपुर देश का दूसरा सबसे कम बारिश वाला जिला था। इस जिले की 19 हजार में से 10 हजार हेक्टेयर जमीन का दारोमदार सिर्फ बारिश पर है। सूखे ने पिछले साल 50 किसानों को खुदकुशी के लिए मजबूर किया, जबकि 10 साल में यहां करीब 700 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। सरकार आत्महत्याओं को सूखे और गरीबी से नहीं जोड़ना चाहती, ऐसे में सरकार किसानों के लिए योजनाएं गिनाने लगती है, फिर भी उसके पास इस हकीकत का जवाब नहीं कि योजनाओं के बावजूद किसान बदहाल क्यों हैं।

उधर, विपक्ष का आरोप है कि बड़े सिंडीकेट्स के चंगुल में फंसकर छोटे किसान शोषण का शिकार हो रहे हैं। 2012 में ही इंडियन कॉन्सिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च की टीम दो बार यहां का दौरा कर चुकी है और उसने भी माना कि हालात बेहद नाजुक हैं और इनसे निपटने के लिए रणनीति की जरूरत है। दूसरी तरफ सामाजिक संस्थाएं भी मानती हैं कि बुरी तरह फैली गरीबी ने किसानों में ह्यूमेन ट्रैफिकिंग का चलन बढ़ा दिया है और इसी वजह से आत्महत्या की दर भी बढ़ रही है।

जो किसान दूसरों का पेट भरने के लिए अनाज पैदा करता है उसके लिए सरकार के पास सिंचाई के लिए जरूरी पानी तक नहीं है। कभी जय किसान का नारा बुलंद होता था लेकिन अब स्थिति विकट है। राज्य में किसान आत्महत्या को मजबूर हैं और जो जिंदा हैं वो जिंदगी चलाने के लिए बेटी बेचने को मजबूर। लेकिन सरकार इससे भी शर्मिंदा नहीं है क्योंकि उनके पास इसे छुपाने को आंकड़े हैं।

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