जबलपुर। इस बेटे ने अपनी यात्रा का आखिरी पड़ाव रखा उज्जैन। लेकिन ये डायरी कहती है कि उज्जैन के आखिरी पड़ाव तक पहुंचने में इस बेटे को कम से कम छह साल और लगेंगे।
इन छह सालों में इस बेटे की उम्र 42 साल हो जाएगी। इसकी चिंता नहीं है कैलाश गिरी को। फिक्र तो ये है कि क्या ये मां छह साल और जिंदा रह पाएगी।
अगर बीच में मां के साथ कुछ होता है तो सोचिए इस बेटे का क्या होगा जो बारह सालों से मां के लिए ऐसी कठोर तपस्या कर रहा है।
जहां बेटे को ये चिंता है, वहीं मां का कलेजा ये कहता है कि इतना भार उठाकर जो बेटा दिन रात उसकी सेवा कर रहा है अगर उसे कुछ हो गया तब क्या होगा। लेकिन इन सबके बीच उन लोगों की दुआएं भी हैं जो इन दोनों को देखकर आंसुओं के साथ निकलती है।
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