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कब-कब इन गड्ढों की वजह से मासूमों की जान पर बन आई

| Jun 21, 2012 at 09:45am | Updated Jun 21, 2012 at 09:50am

नई दिल्ली। कहीं प्रशासन की लापरवाही के गड्ढे तो कहीं गांव वालों का नकारापन। वैसे तो सरकारी महकमे से लेकर जरूरतमंद तक जहां-तहां गड्ढे खोदते रहते हैं लेकिन वो गड्ढे खबर तब बनते हैं जब कोई हादसा हो जाए। लापरवाही के इन गड्ढों पर जिम्मेदारी का ढक्कन आखिर कब लगेगा। ये सवाल पहले भी था और अब भी बरकरार है।

28 जनवरी 2006

इंदौर में तीन साल का दीपक 22 फीट गहरे गड्ढे में फंस गया। गड्ढा ट्यूबवेल लगाने के लिए खोदा गया था। दीपक खेलते-खेलते अचानक गड्ढे में गिर गया। प्रशासन और गांववालों की मदद से कई घंटे बाद दीपक को निकाल लिया गया।

23 जुलाई 2006

ऑपरेशन प्रिंस चला। ट्यूबवैल के लिए खोदे गए गड्ढे में फंसे बच्चे को बचाने का अभियान। गहरे और संकरे गड्ढे में फंसे मासूम को बचाने का अभियान। सेना ने बड़ी सावधानी से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया और कुरुक्षेत्र के प्रिंस को बचा लिया गया।

2 जनवरी 2007

झांसी के पास एक गांव में 30 फुट गहरे गड्ढे में फंसे ढ़ाई साल के बच्चे की मौत हो गई। 18 घंटे की मशक्कत के बाद जब सेना ने बच्चे को गड्ढे से निकाला तब तक वो मर चुका था। जब बच्चे को निकाला गया तो उसके सिर पर चोट के निशान थे और, उसे सांप ने भी डंसा था।

4 फरवरी 2007

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में तीन साल का एक मासूम 60 फिट गहरे गड्ढे में गिर गया। अमित नाम का बच्चा 20 फिट की गहराई तक गिरने के बाद वहीं अटक गया। सेना की मदद से पांच फुट की दूरी पर दूसरा गड्ढा खोदकर उसे निकालने का काम शुरू हुआ। करीब 11 घंटे की मशक्कत के बाद अमित को गड्ढे से निकाला जा सका।

9 अक्टूबर 2008

आगरा के पास लहरापुर में 65 फीट बोरवेल में गिरने से दो साल के सोनू की मौत हो गई। सोनू खेलते-खेलते गड्ढे में गिर गया था। सेना और प्रशासन की टीम सोनू को गड्ढे से निकालने के लिए जुटी थी।

9 नवंबर 2008

कन्नौज में भगरवाड़ा गांव में 60 फुट गहरे बोरवेल में फंसे पुनीत को 18 घंटों की कोशिशों के बावजूद जिंदा बाहर नहीं निकाला जा सका। पुनीत भी खेलते-खेलते बोररवेल में गिर गया था।

21 जून 2009

राजस्थान के दौसा में 200 फीट गहरे एक बोरवेल में चार साल की अंजू गिर गई थी। 21 घंटे की जद्दोजहद के बाद अंजू को बचा लिया गया।

17 सितंबर, 2009

गुजरात के साबरकांठा जिले में ग्यारह साल का एक बच्चा बोरवेल में गिर गया। 11 साल का चिंतन 100 फीट गहरे बोरवेल में गिरा और 40 फीट की गहराई में फंसा गया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद चिंतन को बाहर निकाल लिया गया लेकिन अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई।

इतनी घटनाओं के बाद भी लापरवाही बदस्तूर जारी है। हर जगह मौत के ऐसे गड्ढे दिखते हैं। लेकिन न तो प्रशासन चेत रहा है और न ही लापरवाह नागरिक। आखिर कब तक मासूमों की जिंदगी से ऐसे ही खिलवाड़ चलता रहेगा।

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