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CJ:दिल्ली के एक गांव में 90% लोग लगाते हैं अंगूठा!

  • ऋषि सिन्हा
Posted on Jun 25, 2012 at 05:34pm IST | Updated Jun 28, 2012 at 11:46am IST

नई दिल्ली।जब बात शिक्षा की होती है तो केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से बड़ी बड़ी बातें शुरू हो जाती हैं, पर जब हकीकत से सामना होता है तो तस्वीर कुछ और कहानी बयां करती हैं। देश की राजधानी दिल्ली का एक गांव है बदरपुर खादर। जहां बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई स्कूल नहीं है और यहां के 90 फीसदी लोग आज भी अगूंठा लगाते हैं।

अशिक्षा का ये मामला उठाया है आईबीएन7 सिटीजन जनर्लिस्ट सानिया सिद्दीकी ने, जो बदरपुर खादर की रहने वाली हैं। सानिया के मुताबिक उनका गांव दिल्ली के करीब होते हुए भी यहां कोई स्कूल नहीं है।

CJ:दिल्ली के एक गांव में 90% लोग लगाते हैं अंगूठा!

उनका गांव दिल्ली का वो कोना है जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। 2009 में दिल्ली सरकार ने गांव में एक स्कूल का वायदा किया था। अगले साल काम भी शुरु हुआ, बाउंड्री बन गई। लेकिन अचानक काम रुक गया और फिर दोबारा कभी शुरु नहीं हुआ। गांव के बड़े बुजुर्गों के साथ मिलकर सिद्दिकी ने प्रशासन से संपर्क किया। चिट्ठियां लिखी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।




स्कूल के नाम पर यहां चार दीवारें ही हैं। सरकार का दावा है कि उसने दो साल पहले ही शिक्षा के अधिकार लागू कर दिया था। उसका दावा है कि राजधानी के हर गांव में एक स्कूल है, लेकिन अफसोस बदरपुर खादर के बच्चे ये तक नहीं जानते कि स्कूल देखने में लगता कैसा है।

आईबीएन7 सिटिजन जर्नलिस्ट टीम के साथ सानिया सिद्दीकी सांसद जयप्रकाश अग्रवाल से मिली। सिटिजन जर्नलिस्ट की टीम ने शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव से बात करने की काफी कोशिश की, लेकिन कई फैक्स और फोन करने के बावजूद किसी दफ्तर से जवाब नहीं मिला। इसके बाद सीजे टीम ने मुख्य मंत्री शीला दीक्षित से बात की, लेकिन साफ है कि सरकार जमीनी हकीकत से अनजान है।

दिल्ली सरकार से हमें फिलहाल कोई मदद मिलती नहीं दिख रही है। बहरहाल, हमारे लिए सुकून की बात ये है कि हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि बदरपुर खादर में जुलाई से पहले स्कूल खोला जाए।

सानिया सिद्दिकी के मुताबिक ‘मैं इतनी जल्दी हार नहीं मानूंगी। मैं तब तक लड़ती रहूंगी जब तक कि हंमारे यहां स्कूल ना खुल जाए।’


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