नई दिल्ली। आजकल हरेक की जुबान पर चढ़े सत्यम घोटाले से हमारे रीडर भी अछूते नहीं रहे हैं तभी तो इससे जुड़ी हर खबर पर वे नजरें गढ़ाए हुए हैं।
गुड़गांव के प्रदीप अचंभे में हैं। उन्होंने सवालिया अंदाज में अपनी बात रखते हुए कहा कि जिस देश के पीएम, वित्त मंत्री और वित्त सचिव सभी इकॉनमी मामलों के महारथी हों फिर भी ऐसा घोटाला हो जाए समझ नहीं आता। उन्होंने लिखा है कि सत्यम मे घोटाला हो रहा हो और देश की सरकारी वित्तिय एजेंन्सिया सो रही हों यह बात गले नहीं उतरती क्योंकि इतना बड़ा घोटाला बिना रिश्वत लिए संभव ही नहीं है। साथ ही उन्होंने लिखा कि प्राइस वाटर हाउस जैसी विश्व विख्यात ऑडिट कंपनी की भी इसमें बराबर की हिस्सेदार रही है।
दूसरी ओर, गुड़गांव से हमारे एक और रीडर मनोज अरोड़ा इस पूरे हालात से बुरी तरह चिंतित नजर आते हैं। उन्होंने सवाल किया कि सत्यम के इस खुलासे के बाद आईटी इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा? क्या एफआईआई पर भी असर होगा?
गोल्डन ग्लोब में अपनी धाक जमाने वाले ए. आर. रहमान को हमारे पाठकों ने भी हाथोंहाथ लिया है। जयपुर से पूनम ने लिखा कि हमें सचमुच रहमान, इरफान खान और स्लमडॉग मिलियेनर्स के दूसरे कलाकारों पर गर्व है।
दूसरी ओर दिन की एक और बड़ी खबर ओबामा के मुंबई हमले पर दिए गए बयान को भी पाठकों ने तरजीह दी है। हमारे एक रीडर हरेंद्र सिंह ने गाजियाबाद से लिखा कि काश हमारे देश के राष्ट्रपति अथवा प्रधानमंत्री अमेरिका की तरह होते तो हम आतंकवाद से बहुत पहले मुक्त हो जाते।
वहीं जमशेदपुर ने पी. के. सिन्हा ने लिखा कि सिर्फ़ ओबामा ही क्यों, विश्व के सभी नेताओं को एकजुट होकर आतंकवाद का समूल नाश करने की इच्छा दिखानी होगी। यह कोई एक देश की समस्या नहीं है। भारत पर असर ज़्यादा है क्योंकि उसके पड़ोस मे आतंकवाद पनप रहा है।
चलते-चलते: पाक पर पाठकों की गुस्सा अभी भी बना हुआ है। पाठकों ने पाक पीएम गिलानी के उस बयान को आड़े हाथों लिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि हम अपने यहां किसी के दोषी साबित होने पर भी उसे भारत को नहीं सौंपेंगे। इस पर दुर्गापुर से राजेंद्र ने लिखा है कि यह सब अमेरिका से पैसा पाने के हथकंडे हैं और कुछ नहीं। वहीं बीवर के अनिल कुमार झावेर लिखते हैं कि इस सबकी जड़ अमेरिका ही है जब तक अमेरिका पाक का साथ नहीं छोड़ेगा आतंकवाद खत्म नहीं होगा।
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