यहां पढ़ने और पढ़ाने वाले दोनों का भविष्य अंधेरे में

| Jun 28, 2012 at 12:05pm | Updated Jun 28, 2012 at 12:11pm

बर्धमान (पश्चिम बंगाल)। पश्चिम बंगाल के बर्धमान में सिटिजन जर्नलिस्ट जयप्रकाश सिंह बात रहे हैं कि कैसे अधिकारियों के लापरवाह रवैये से शिक्षक और छात्रों दोनों का भविष्य अंधेरे में है। पश्चिम बंगाल में ECL यानी इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड 600 से ज्यादा स्कूल चला रहा है। इसके बावजूद बावजूद ना यहां पढ़ने वाले खुश हैं और ना पढ़ाने वाले।

इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के चल रहे स्कूलों की एक मिसाल है बर्धमान जिले के रानीगंज इलाके में बना ज्ञान विकास विद्यालय। चौथी क्लास तक बने इस स्कूल में करीब 125 बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं लेकिन ये कितने ख़तरनाक माहौल में पढ़ते हैं इसका अंदाजा स्कूल की खस्ताहाल इमारत को देख कर लगा सकते हैं।

1982 में बने इस स्कूल में पढ़ाई भले ही मुफ्त कराई जाती हो लेकिन इन स्कूलों को किसी भी बोर्ड ने मान्यता नहीं दी है। इस वजह से यहां पर पढ़ाई पूरी कर दूसरे स्कूलों में एडमिशन लेने में छात्रों को काफी दिक्कत आती है। इन स्कूलों की ओर अभिभावकों का रुझान दिन-ब-दिन कम होता जा रहा है।

एक ओर जहां छात्र परेशान हैं अपने भविष्य को लेकर तो दूसरी ओर यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों की हालत भी कम दयनीय नहीं है। वेतन के तौर पर हर शिक्षक को केवल 4 हजार रुपये हर महीने मिलते हैं लेकिन उनको ये वेतन भी मिलता है 2-3 महीने बाद।

आर्थिक रूप से कमजोर टीचर पिछले 15 सालों से अपना आंदोलन चला रहे हैं, इस दौरान इन्होंने ECL के खिलाफ ना सिर्फ दिल्ली में कई बार धरना दिया बल्कि संसद में भी इनकी आवाज को कई बार उठाया गया। इतना ही नहीं सितंबर 2009 में लोकसभा की एक समिति ने हमारे लिए न्यूनतम वेतनमान की पैरवी की थी लेकिन उस पर भी कोई अमल नहीं हुआ।

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