बीजिंग। चीन में समलैंगिक महिलाओं (लेस्बियन) के रक्तदान करने पर लगी कानूनी पाबंदी हटा ली गई है। हालांकि पुरुष समलैंगिकों पर यह प्रतिबंध लागू रहेगा। यह पाबंदी 1998 में एड्स की रोकथाम इरादे से लगाई गई थी।
यौन विशेषज्ञ ली यिन्हे ने ग्लोबल टाइम्स डेली को बताया कि चीन में लोग समलैंगिकता और एड्स में अंतर नहीं कर पाते हैं और इसीलिए समलैंगिकों को रक्तदान से प्रतिबंधित करने वाली श्रेणी में डाल दिया गया था।
अब स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लेस्बियनों को रक्त दान की छूट देने वाला यह नया संशोधित कानून एक जुलाई से लागू हो गया है।
समलैंगिकों के हित के लिए एक गैर सरकारी संगठन चलाने वाली समलैंगिक महिला जियान का कहना है कि 2008 में सिचुआन प्रांत में आए भूकम्प के बाद उन्हें इसी कानून का हवाला देकर रक्तदान से रोक दिया गया था। वह कहती हैं कि अब यह वैज्ञानिक तौर पर साबित हो चुका है कि एड्स संलैंगिकता का कारण नहीं बल्कि गलत यौन व्यवहार के कारण फैलता है।
चीन में एड्स का पहला मामला 1985 में एक अर्जेटीना के एक पर्यटक की मौत के बाद सामने आया था। 27 साल की एक लेस्बियन महिला हुई जिन का कहना है कि चीन में पश्चिमी देशों की तरह समलौंगिक पुरुषों को भी रक्तदान की आजादी मिलनी चाहिए।
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