नई दिल्ली। भारत का नाम दुनिया के उन देशों में शामिल है, जिनका सड़क सुरक्षा के मामले में बेहद खराब रिकॉर्ड है। इस स्थिति को सुधारने के लिए सड़क सुरक्षा को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है, लेकिन यह एक उबाऊ विषय के रूप में नहीं होगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव नितिन आर. गोकर्ण ने बताया कि सड़क सुरक्षा को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के आठवीं से 12वीं तक के सभी विषयों के पाठ्यक्रम में जोड़ा जा रहा है।
गोकर्ण ने मंगलवार को फिक्की सभागृह में फिक्की महिला संगठन द्वारा यहां आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा, "यह यातायात नियमों पर एक उबाऊ अध्याय के रूप में नहीं होगा, लेकिन यह विज्ञान, नागरिक शास्त्र और इतिहास से जुड़ा होगा। इसे दिलचस्प जानकारी के रूप में शामिल किया जाएगा, जिससे बच्चे इन्हें अपने मस्तिष्क में रख सकें।" उन्होंने बताया कि एनसीईआरटी की पाठ्यक्रम समिति इसके लिए विषय वस्तु का निर्धारण कर रही है।

गोकर्ण ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि देश में प्रत्येक नौ मिनट में सड़क दुर्घटना की वजह से एक मौत होती है। उन्होंने कहा कि देश में प्रत्येक वर्ष पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और दुर्घटनाओं के कारण 1,40,000 लोगों दम तोड़ देते हैं। इसका अर्थ है कि हर चार मिनट में एक सड़क दुर्घटना होती है और हर नौ मिनट में दुर्घटना के कारण एक व्यक्ति दम तोड़ देता है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने यह भी कहा कि दुर्घटनाओं का एक बड़ा हिस्सा द्वितीय श्रेणी के शहरों से है, जहां लोग अधिक यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं। दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या भी इन्ही शहरों में अधिक है। उन्होंने बताया कि देश में लोगों में 'सड़क उपयोगकर्ता व्यवहार' की संस्कृति नहीं है और वे एक अधिकार के रूप में यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं।
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