गांव वाले 21 साल से जमीन देकर कर रहे हैं अस्पताल का इंतजार

| | Jul 16, 2012 at 05:40pm

उजरागांव। असम के उजरागांव के लोग पिछले 21 साल से एक अस्पताल बनने का इंतजार कर रहे हैं। सीजे दीपांकर बारीक के मुताबिक गांव के 60 वर्षीय धनीराम बोरा के बेटे की मौत हो गई क्योंकि उसे डॉक्टर के पास नहीं ले जा सका। अगर गांव में अस्पताल बन जाता तो शायद इनका बेटा बच जाता। 60 वर्षीय धनीराम बोरा की तरह इस गांव में कई लोग अपनों की नहीं बचा सके। पिछले दो दशकों से उजरागांव के लोग इस उम्मीद पर जी रहे हैं कि एक दिन उनकी बस्ती में अस्पताल बनेगा।

सीजे दीपांकर बारीक के परिवार सहित 20 परिवारों ने 1989 में अपनी 4 हेक्टेयर जमीन राज्य सरकार को खुशी-खुशी दान दी, क्योंकि इस जमीन पर 30 बेड पर अस्पताल बनने वाला था।

कागजों में इस अस्पताल का नाम है Mahabdeb Community Health Centre। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत ने इस अस्पताल का शिलान्यास भी किया। PWD ने काम शुरू भी कर दिया था। अस्पताल के लिए जो सामान आया था सब चोरी हो चुका है। यहां के लोग निराश हो गए। बेवजह जमीन खोने के डर से गांव वालों ने जर्जर चारदीवारी के अंदर खेती करना शुरू कर दी। 2009 की अपनी रिपोर्ट में कैग ने काम पूरा ना करने पर PWD को फटकार लगाई। लेकिन अस्पताल का काम फिर भी शुरू नहीं हुआ। लोग पूरी तरह से सब्र खो चुके हैं। हालांकि पहले वो अपनी ज़मीन वापस मांग रहे थे, लेकिन अब भी उनकी मांग है कि जल्द से जल्द अस्पताल बने।

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