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UPA सरकार में हैसियत बढ़वाने पर अमादा हुए पवार

| Jul 20, 2012 at 08:11am | Updated Jul 20, 2012 at 04:35pm

नई दिल्ली। बुधवार को प्रणब मुखर्जी के विदाई भोज में यूपीए में दिखी एकजुटता एक दिन भी न टिक सकी। उसके अगले ही दिन यूपीए गठबंधन में मतभेद खुलकर सामने आ गए और आलम यह हुआ कि गुरुवार को कैबिनेट बैठक का बहिष्कार कर एनसीपी के मुखिया और कृषि मंत्री शरद पवार ने कांग्रेस से अपनी खुली नाराजगी जताई।

प्रणब मुखर्जी के इस्तीफे से खाली हुए कैबिनेट में नंबर दो का ओहदा खुद को न दिए जाने से शरद पवार और एनसीपी खासी नाराज है। दिल्ली में रहते हुए भी पवार और पटेल गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में शामिल नहीं हुए। इसकी जगह शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल और पार्टी महासचिव डी पी त्रिपाठी ने पवार के घर उसी वक्त बैठक की।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी की बैठक के बाद शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल ने कैबिनेट से इस्तीफे की पेशकश की है। हालांकि एनसीपी अपने इस दांव पर फिलहाल खुलकर कुछ कहने से बच रही है। इसके पहले भी शरद पवार और उनकी पार्टी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए हामिद अंसारी की उम्मीदवारी तय करने को लेकर बुलाई गई यूपीए की बैठक का बहिष्कार किया था।

दरअसल प्रणब मुखर्जी के इस्तीफे के बाद हुई हुई पहली कैबिनेट की बैठक में शरद पवार प्रधानंमत्री के बगल वाली नंबर 2 कुर्सी पर बैठे थे। लेकिन अगली बैठक में नंबर दो की इस कुर्सी पर रक्षामंत्री ए.के.एंटनी को बैठे देख पवार नाराज हो गए। एनसीपी को भी कांग्रेस सरकार का ये कदम नागवार लगा। हालांकि बाद में पीएमओ और कैबिनेट सचिवालय की वेबसाइट से मंत्रियों के वरिष्ठता क्रम वाली सूची हटा ली गई।

कांग्रेस की तरफ से पवार की नाराजगी को खास तवज्जो न दिए जाने ने आग में घी का काम किया। शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल ने न सिर्फ गुरुवार को कैबिनेट बैठक का बहिष्कार किया बल्कि सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट से इस्तीफे की पेशकश भी कर दी। सूत्रों के मुताबिक आज से शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल अपने मंत्रालय दफ्तर में भी नहीं बैठेंगे। इस्तीफे की पेशकश के साथ एनसीपी ने ये संदेश भी दिया है कि सिर्फ बाहर से समर्थन करेगी।

सूत्रों के मुताबिक एनसीपी इसलिए भी नाराज है क्योंकि पवार जैसे कद्दावर मंत्री को सुरक्षा से जुड़ी कैबिनेट की अहम समिति में भी नहीं रखा गया है। वैसे, इस्तीफे की पेशकश को सरकार पर दबाव बनाने की योजना का हिस्सा भी माना जा रहा है। चर्चा है कि कैबिनेट में जल्दी ही फेरबदल हो सकता है। ऐसे में एनसीपी दबाव बनाए रखना चाहती है। एनसीपी के नौ सांसद हैं और वो केंद्र और महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रही है। जो भी हो, तमाम मुश्किलों से घिरी यूपीए सरकार को पवार के इस रुख से झटका तो लगा ही है।

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