पटना। नेपाल के तराई क्षेत्रों में हो रही लगातार भारी बारिश के कारण बिहार की नदियां उफान पर हैं। उत्तर बिहार के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है, तो कई गांवों के लोग बाढ़ की आशंका से पलायन करने लगे हैं।
बागमती और कमला बलान नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान को पार कर गई हैं तो कोसी और गंडक नदियों में भी जलस्तर बढ़ने की खबर है।
पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा-बाल्मीकीनगर मार्ग पर बाढ़ का पानी चढ़ जाने के कारण आवागमन बंद हो गया है। एक अधिकारी के मुताबिक बलजोरा के समीप सड़क पर पांच फुट ऊपर पानी बह रहा है। सिकटा प्रखंड में रक्सौल-नरकटियागंज रेल मार्ग पर बाढ़ का पानी रेल पटरी के समीप से बह रहा है।
बगहा के हरनामाड़ स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में 97 छात्राओं सहित 105 लोग बाढ़ के पानी में फंस गए हैं। हालांकि बगहा के अनुमंडल अधिकारी रमण कुमार ने शुक्रवार को बताया कि उनके निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फंसे लोगों के पास सभी प्रकार के आवश्यक सामान हैं।
मधुबनी जिले के फुलपरास, मधेपुर, और सुपौल जिले के निर्मली और मरौना के चार दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। इधर, मुजफ्रपुर में औराई प्रखंड के 2000 घरों में बागमती की बाढ़ का पानी घुस गया है। गोपालगंज जिले में गंडक में उफान के कारण कटघरवां और बरई पट्टी में कटाव की समस्या उत्पन्न हो गई है।
पटना के बाढ़ नियंत्रण कक्ष में प्रतिनियुक्त कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार ने शुक्रवार को बताया कि सुबह आठ बजे कोसी नदी के वीरपुर बराज से जलस्राव 1,48,200 क्यूसेक था, जबकि छह बजे यहां से 1,54,270 क्यूसेक जलस्राव रहा। इधर, वाल्मीकीनगर स्थित गंडक बराज में गंडक का जलस्राव सुबह आठ बजे 1,83,400 क्यूसेक था, जबकि छह बजे 2,12,200 क्यूसेक जलस्राव था।
नियंत्रण कक्ष के मुताबिक बागमती सोनाखान, डुब्बाधार, चंदौली और बेनीबाद में खतरे के निशान के उपर बह रही है, जबकि कमला बलान झंझारपुर और ललबकिया के पास खतरे के निशान को पार कर गई है।
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