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सूखे की आहट सुन PM एक्टिव, मंत्रालयों को किया अलर्ट

| Jul 23, 2012 at 09:07pm | Updated Jul 23, 2012 at 09:12pm

नई दिल्ली।सूखे की आशंका ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चिंताएं बढ़ा दी हैं। उन्होंने माना है कि कमजोर मॉनसून की वजह से कीमतें बढ़ रही हैं। बारिश कम होने की वजह से इस साल कृषि क्षेत्रफल में भारी कमी आई है। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि वे तालमेल बनाते हुए हर हफ्ते स्थिति का जायजा लें।

जुलाई का तीसरा हफ्ता बीत गया और मॉनसून अभी कमजोर ही है। इसका असर खेती और पीने के पानी पर दिखने लगा है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी माना है कि कमजोर मॉनसून की वजह से न सिर्फ खेती और जल प्रबंधन में दिक्कत आ रही है बल्कि खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी बढ़ रही हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक हालांकि गेहूं और चावल की कीमतें स्थिर हैं लेकिन चीनी, दाल और सब्जियों की कीमतें बढ़ने लगी हैं। इससे निपटने के लिए खाद्य मंत्रालय ने जनवितरण प्रणाली में दाल पर सब्सिडी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। पिछले साल के मुकाबले इस बार 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कम बुआई हुई है। इससे ज्वार बाजरा जैसे पारंपरिक अनाज की पैदावार पर असर पड़ेगा। देश के 84 बड़े जलाशयों में पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 61 फीसदी पानी भरा है लेकिन जल संसाधन मंत्रालय को भरोसा है कि पीने के पानी का संकट पैदा नहीं होगा।

कमजोर मॉनसून से पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों को तैयार रहने को कहा है। प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में अंतर मंत्रालय समूह बनाया है जो हर हफ्ते राज्य सरकारों के साथ स्थिति का जायजा लेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की जा रही है। पीने के पानी की स्थिति का जायजा भी अब हर पंद्रह दिनों की जगह हर हफ्ते लिया जाएगा। कृषि मंत्रालय को बीज की पूरी व्यवस्था रखने को कहा गया है ताकि जरुरत पड़ने पर राज्यों को उपलब्ध कराया जा सके।

प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक देशभर में अब भी मॉनसून में 22 फीसदी की कमी है। उत्तर पश्चिम में 33 फीसदी, मध्य भारत में 26 फीसदी, दक्षिण भारत में 26 फीसदी और देश के पूर्वी हिस्से में 10 फीसदी कम बारिश हुई है। सबसे बड़ा संकट पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, सौराष्ट्र और कर्नाटक में पैदा हुआ है जहां मॉनसून की बरसात बहुत कम हुई है।

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